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स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ पटना: शेखर सुमन

मैं शेखर सुमन बोल रहा हूं। ‘हिन्दुस्तान’ के पटना कार्यालय में शुक्रवार को लगी ‘वोटर की अदालत’। रूबरू थे पटना साहिब से कांग्रेस प्रत्याशी और अभिनेता शेखर सुमन। कार्रवाई जैसे ही शुरू हुई, लोगों ने सवालों की बौछार कर दी। शहर के लिए उनकी योजनाएं, सड़क, बिजली, पानी, जलजमाव, कांग्रेस की नीतियों, फिल्मी दुनिया से सियासत में कदम रखने समेत कई मुद्दों पर लोग सवाल पूछ लेना चाहते थे। वह भी पूरी तैयारी के साथ अदालत में खड़े थे। शेखर का सपना है, स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ हो पटना। यदि आप अभिनेता न होते तो क्या आपको टिकट मिलता? अवधेश कुमार, महेंद्रूड्ढr हो सकता है, टिकट नहीं मिलता। मगर कहीं न कहीं, मेरी ईमानदार छवि और काम करने का जज्बा भी इसमें अहम रोल अदा करता है।ड्ढr पोल-खोल कार्यक्रम में आपने कहा था कि आप कभी पॉलिटिक्स में नहीं आएंगे। बदलाव का कारण क्या है? सत्येंद्र, अनीसाबादड्ढr जिंदगी के ऊहापोह में कहीं अहसास हुआ कि कुछ न कुछ कमी है, राजनीति में जो गलत हो रहा है, क्या उसे बदला नहीं जा सकता है। इसलिए बदलाव के लिए आया हूं। काफी सोच-विचार कर ही यह तय किया है।ड्ढr ड्ढr मुंबई में इतने दिन रहने के बाद आपको यह महसूस नहीं हो रहा है कि आप बिहार की जमीनी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं। प्रह्लाद, कंकड़बागड्ढr ऐसा कुछ नहीं है। मैं यहीं जनमा हूं। मिट्टी का कर्ज है और ऐसा नहीं है कि आदमी बाहर चला जाता है तो अपनी मां को भूल जाता है।ड्ढr गरीब मेधावी छात्रों के लिए क्या योजना है? शंकर, बैंक रोडड्ढr योजनाएं तो तब बनेंगी जब चुनकर आ जाऊंगा। शिक्षा के बगैर किसी भी क्षेत्र का विकास संभव नहीं है। मेरी प्राथमिकताओं में शिक्षा प्रमुख है।ड्ढr सूबे में राहुल गांधी जैसे नेता क्यों नहीं?ड्ढr सुजात, सुल्तानगंजड्ढr राजनीति में युवाओं को आना चाहिए। युवा यह न सोंचे कि राजनीति ‘गंदगी का अखाड़ा’ है। मेरी कोशिश होगी कि राजनीति में युवा आएं।ड्ढr जाम की समस्या का समाधान कैसे? विष्णु यादव जयरामबाजार, खगौलड्ढr पटना ही नहीं, बंबई में भी ट्रैफिक जाम की समस्या है। मेरी कोशिश होगी कि सड़कों को अच्छा बनाया जाए। वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू करनी होगी।ड्ढr राज ठाकर मुंबई में बिहारियों का विरोध करते हैं। आपने क्या किया? पिंटू (महेंद्रू)ड्ढr -वैसे हिंसा का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए, सद्भाव से इस मुद्दे का समाधान संभव है। लेकिन सार्थक पहल नहीं की गई। राज ठाकर को किसी ने समझाया ही नहीं। मैंने कहा था कि शेर अपनी मांद में शेर होता है, पहलवान अपने अखाड़े में पहलवान होता है, यदि राज के पास हिम्मत है तो बिहार में आकर बोलें तो, औकात पता चल जाएगी।ड्ढr फिल्मी सितार राजनीति में आते हैं, फिर गुम हो जाते हैं। क्या आप सुनील दत्त की तरह काम करंगे? मो. हुसैन, फ्रेजर रोडड्ढr अच्छा लगा कि आपने अच्छा उदाहरण दिया। दत्त साहब ने नि:स्वार्थ भाव से काम किया। अब साउथ की ओर देखिए, वहां जयललिता राजनीति में आईं, काम किया और आज भी राजनीति में बनी हैं। मैं अच्छा उदाहरण ही पेश करने के लिए सब कुछ छोड॥कर राजनीति में आया हूं। ईश्वर से प्रार्थना है कि लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरूं।

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