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बिहार को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली

भारत-नेपाल के बीच जल संसाधन समस्या को लेकर लंबे गतिरोध के बाद सबकुछ पटरी पर लाने की कसरत शुरू हो गई है। बिहार इसके केन्द्र में है। चार वर्षो के बाद दोनों देशों में वार्ता शुरू हुई और समस्याओं के समाधान के लिए पहली बार चार उच्चस्तरीय कमेटियों का गठन भी हुआ। बिहार तीन कमेटियों में मुख्य सहभागी है। यही नहीं पहली बार कमेटियों को काफी सशक्त बनाया गया है और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल करते हुए उनकी जिम्मेवारियां भी तय की गई हैं। अक्तूबर 2004 केड्ढr बाद से भारत-नेपाल के बीच वार्ता बंद थी।ड्ढr ड्ढr नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड की भारत यात्रा के बाद यह गतिरोध टूटा। बताया जाता है कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोसी-गंडक परियोजना से संबंधित कमेटी में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। माना जाता है कि कोसी तटबंध के क्षतिग्रस्त होने का एक बड़ा कारण स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक समन्वय का अभाव था। कोसी तटबंध को बचाने के लिए वीरपुर के चीफ इंजीनियर और नेपाल के जलस्रेत मंत्रालय के बार-बार अुनरोध के बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक सहयोग नहीं मिला। ऐसे में तटबंध से संबंधित बिहार के जिलों के डीएम और नेपाल के सीडीओ को कमेटी में रखे जाने से ‘लॉ एंड ऑर्डर’ में सहयोग मिलेगा। 28 सदस्यीय ज्वाइंट कमेटी ऑन कोसी एंड गंडक प्रोजेक्ट (जेसीकेजीपी) के टीम लीडर नेपाल के जल संसाधन महानिदेशक के साथ-साथ बिहार के जल संसाधन सचिव होंगे। विभाग के इंजीनियर इन चीफ, वीरपुर व वाल्मीकिनगर के चीफ इंजीनियर सदस्य होंगे जबकि मोतिहारी के चीफ इंजीनियर सदस्य सचिव होंगे।ड्ढr ड्ढr इसके अलावा बेतिया व सुपौल के डीएम और सुनसरी, सपतरी व नवलपरासी के सीडीओ विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे। 32 सदस्यीय नेपाल-भारत के मंत्री स्तर की कमेटी में बिहार के जल संसाधन मंत्री व विभागीय सचिव और 24 सदस्यीय ज्वाइंट स्टैंडिंग टेक्िनकल कमेटी में बिहार का एक प्रतिनिधि रहेगा।ं

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