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अस्पताल वालों की बेरुखी से गोपाल भी मरा

अंतत: गोपाल ने भी दम तोड़ दिया। शनिवार को सिविल सर्जन ने सदर अस्पताल के मुआयने के क्रम में परिसर में एक को मृत तथा दूसर को मरणासन्न स्थिति में पाया था। मरणासन्न हालत में जमीन पर पड़े युवक को अपने सामने नहला कर सीएस डा. आजाद हिन्द ने अस्पताल उपाधीक्षक डा. वी.एस. यादव को उसे भर्ती कर इलाज शुरू करने का निर्देश दिया था। नहाने के क्रम में उस युवक ने खुद का नाम गोपाल तथा गांव टिकुलिया मुरलीगंज बताया था।ड्ढr ड्ढr रविवार को अस्पताल जाने पर पता चला कि आइसोलेशन वार्ड पहुंचाये गये उस युवक की मौत तकरीबन 0 बजे हो चुकी थी। बेड की बजाय फर्श पर पड़ी उस युवक की लाश पर मक्िखयां भिनभिना रही थीं। वहां मौजूद एक अन्य मरीा के परिान ने बताया कि सीएस के जाने के बाद डीएस की बात तो दूर किसी स्वास्थ्यकर्मी ने उसे छुआ तक नहीं। उसे न तो किसी ने खाने के लिए दिया और न ही कोई दवा ही दी। तड़प-तड़प कर उसकी जान चली गयी। चेम्बर में बैठे डीएस डा. वी.एस. यादव से जब उस युवक की मौत के बार में पूछा गया तो वे सकते में आ गये। उस युवक को क्या बीमारी थी? उसका क्या इलाज किया गया यह तत्काल बताने की स्थिति में वह नजर नहीं आये।ड्ढr ड्ढr डीएस ने वार्ड इंचार्ज को तलब किया। काफी देर बाद पहुंचे वार्ड इंचार्ज लैब टेक्नीशियन बिनोद शंकर झा आये और एक अज्ञात व्यक्ति का बीएसटी दिखाते बोले कि यह उसी का पर्चा है। श्री झा के कथनानुसार तथा बीएसटी सं. 2735 के अनुसार इस मरीा को 2सितम्बर को सुपर बाजार के कैम्प से लाकर भर्ती कराया गया और इलाज के बाद चंगा पाकर इसे 2 अक्तूबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी। अब मात्र दो दिन बाद ही चंगा हो गया युवक मरणासन्न हालत में अस्पताल में कैसे पहुंचा? इसका जवाब उनके पास नहीं था। सीएस के निर्देश के बाद उसका क्या इलाज हुआ इसका जवाब न तो उस वार्ड इंचार्ज के पास था और न ही उसके द्वारा दिखायी जा रही बीएसटी पर ही अंकित था। बीएसटी यह साबित नहीं करती कि यह उसी व्यक्ित की है जिसकी मौत हुई। श्री यादव ने इस मामले में चुप्पी साध ली। सिविल सर्जन डा. आजाद हिन्द प्रसाद ने बताया कि कल ही उन्होंने डीएस से स्पष्टीकरण पूछा है कि निरीक्षण के दौरान एक व्यक्ति बरामदे पर मृत और दूसरा नीचे जमीन पर क्यों पाया गया। डीएस को उसे उठाकर समुचित इलाज कराने का उन्होंने निर्देश दिया था। आज जब इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गयी है तो यह अति गंभीर मामला है।

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  • Web Title: अस्पताल वालों की बेरुखी से गोपाल भी मरा