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खून-ऑक्सीजन की कमी से गर्भस्थ शिशु को खतरा

गर्भ में पल रहे शिशु को मां से पर्याप्त मात्रा में खून और ऑक्सीजन न मिलने से पैदा होनेवाले बच्चे का मस्तिष्क क्षतिग्रस्त हो सकता है। ऐसे गर्भस्थ शिशुओं को कार्डियोटोकोग्राफी उपकरण की सहायता से जांच और उसका समुचित इलाज संभव है। ये बातें स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. प्रज्ञा मिश्रा ने रविवार को महावीर वात्सल्य अस्पताल में ‘कार्डियोटोकोग्राफी’ विषय पर आयोजित वैज्ञानिक सत्र को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि हर महिला एवं प्रसव रोग केन्द्र पर कार्डियोटोकोग्राफई की सुविधा आवश्यक है। ऐसी सुविधा नहीं रहने पर वैसे बच्चों की देखभाल नहीं की जा सकती जिन्हें हाइपोक्िसया की बीमारी की आशंका होगी। इस रोग में नवजात का ब्रन डैमेज हो जाता है। इससे स्नायु संबंधित बीमारी विकसित हो जाती है।ड्ढr ड्ढr गर्भस्थ शिशु के हृदय की धड़कन की जानकारी आवश्यक है। इसकी सर्वाधिक आवश्यकता वैसे गर्भवती के लिए है जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी हाई रिस्क समूह में आती है। जिन गर्भवती महिलाओं को अधिक रक्तस्रव होता है उनके गर्भस्थ बच्चों के धड़कन का प्रबंधन भी होना चाहिए। महिला रोग विशेषज्ञ डा.सारिका राय ने बताया कि कार्डियोटोकोग्राफी मशीन से यह भी जांच की जाती है कि सामान्य प्रसव के दौरान पैदा लेनेवाला नवजात दर्द को बर्दास्त कर सकता है अथवा नहीं।ड्ढr सत्र को संबोधित करते हुए डा.उषा शर्मा बी.एन. ने कहा कि कार्डियोटोकोग्राफी मशीन से गर्भस्थ शिशु को होनेवाले 30 फीसदी खतर से बचाया जा सकता है। यह मशीन सस्ती है और इसका जांच भी सरल व आसान है। वैज्ञानिक सत्र की अध्यक्षता डा.शांति राय ने की जबकि इसमें डा.मंजूगीता मिश्रा, डा.विद्या कपूर, डा.कुसुम कपूर, डा.अनिता सिंह, डा.शांति एच.के.सिंह, डा.अरुण कुमार ठाकुर, डा.रीता सिन्हा सहित दर्जनों चिकित्सकों ने भाग लिया।

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