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साहेबगंज में दहशत तरावा में सन्नाटा

साहेबगंज थाना क्षेत्र के तरावां गांव में नक्सली मुठभेड़ को लेकर रविवार को सन्नाटा पसरा रहा। जिस टोले में शनिवार को मुठभेड़ में माओवादियों की गोली से बीएमपी का जवान संजीव कुमार शहीद हुआ, उसके आसपास के घरों के पुरुष सदस्य पलायन कर गए हैं। गांव में सिर्फ बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं बची हैं। गांव में नक्सलियों के डेरा डालने और मुठभेड़ की बाबत कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं है। किसी भी महिला से पूछने पर रटा-रटाया जवाब मिलता है-‘मुठभेड़ के समय मैं गांव में नहीं थी..गोली चलने की आवाज सुनकर मैं अपने घर में छिप गई।’ड्ढr ड्ढr शनिवार की रात प्रस्थान करने के बाद रविवार की शाम तक कोई पुलिस दस्ता गांव में तलाशी करने अथवा घटना की बाबत पूछताछ करने तरावां गांव नहीं पहुंचा है। एसपी सुधांशु कुमार पुलिस के अगले कदम की बाबत कुछ भी बात करने से परहेा कर रहे हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि तरावां में पुलिस की तैनाती अथवा छापेमारी की तत्काल कोई योजना नहीं है। अपरिचित लोगों को देखकर बच्चे और औरतें चौकस हो जाती हैं। पुलिस के लौटने के बाद पूर्वी चम्पारण की सीमा से जुड़ी पंचायतों में दहशत है। इधर रविवार की सुबह बैरिया पुलिस लाइन में एसपी, सार्जेट एवं जवानों ने शहीद संजीव के शव को श्रद्धांजलि दी।ड्ढr ड्ढr जवानों ने राइफलें उलट कर सलामी दी। संजीव का शव लेने के लिए उसका भांजा सभापति यादव मानसी खगरिया से देर रात मुजफ्फरपुर पहुंच गया। सभापति के साथ पुलिस का एक जत्था पूर्वाह्न् में संजीव के सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड के सितुआहा स्थित पैतृक गांव के लिए रवाना हो गया।ं

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