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मच्छरों का यमराचा बोले तो मेढक

एक प्रसिद्ध मच्छर मारक मशीन के विज्ञापन में मेढक नुमा मशीन को मच्छर चट करते दिखाया गया था। हो सकता है विज्ञापन में इस मशीनी मेढक का इस्तेमाल सिर्फ उसे आकर्षक बनाने के लिए किया हो, पर यह बात सौ फीसदी सच है कि मच्छर का सबसे बड़ा दुश्मन मेढक ही है।ड्ढr किसी भी बेहतरीन मशीन से कई गुना यादा काम का होता है एक मेढक क्योंकि वह अपनेोीवनकाल में 15 से 16 लाख मच्छरों को नष्ट कर देता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन दोनों की दुश्मनी ही मच्छर के प्रकोप का सही इलाा है।ड्ढr वज्ञानिकों की सोच के पीछे एक बड़ा कारण यह है कि मच्छरों की रोकथाम में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान नाकाम है। दवाएँ बनती हैं, लेकिन मच्छरों में उनके प्रति प्रतिरोधक क्षमता पैदा हो जाती है। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार पहले मच्छरों की रफ्तार इस तेजी से नहीं बढ़ पाती थी क्योंकि मच्छरों की फौज का मुकाबला मेढक कर रहे थे लेकिन पिछले कुछ दशकों में इनकी संख्या तेजी से घटने के कारण मच्छर बढ़ गए। वैज्ञानिकों का मानना है कि मच्छरों की वृद्धि दर को रोकने के लिए सरकार को मेढकों की आबादी बढ़ाने के उपायों पर भी विचार करना चाहिए। बाजार में हालाँकि मच्छरों को मारने या भगाने के लिए कई प्रोडक्ट हैं, लेकिन मच्छरजनित बीमारियाँ ौसे मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया, जापानी इन्सेफेलाइटिस, चिकनगुनिया आदि घटने की बजाय बढ़ती जा रही हैं। देश में मेंढकों की घटती संख्या के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। दरअसल मच्छरों का लारवा मेढक का प्रिय भोजन है। अपनेोीवनकाल में एक मेढक औसतन 15-16 लाख मच्छरों को नष्ट कर देता है। सिर्फ 50 मेढक एक एकड़ धान की खेती को सभी प्रकार के कीटों से बचा सकते हैं। धान के खेतों में जापानी इन्सेफेलाइटिस फैलाने वाले मच्छर भी पनपते हैं। यदि मेढक हों तो वह इसका लारवा खा जाएं।ड्ढr नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मलेरिया रिसर्च के शोधकर्ताओं के. राघवेन्द्र, पी. शर्मा तथा एपी दास के अनुसार, कुछ दशक पहले तक मेढक की टांगों का निर्यात यूरोपीय देशों को होता था जहां कुछ डिशों में उनका इस्तेमाल होता था लेकिन 1में प्रतिबंधित कर दिया गया। हालाँकि तब तक इसमें भारी गिरावट आ गई थी। वैज्ञानिकों के अनुसार, बढ़ते शहरीकरण, रन फॉरस्ट घटने और जल स्रेतों के सूखने से मेढकों के ठिकाने घटे हैं।

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  • Web Title: मच्छरों का यमराचा बोले तो मेढक