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दुर्घटना में तीन की मौत देवघर। देवघर-सारवां मुख्य पथ पर सोमवार को यात्रियों से खचाखच भर जीप व टेम्पो की टक्कर में तीन लोगों की मौत हो गयी। छह लोग जख्मी हो गये। घायलों में चार की हालत नाजुक बनी हुई है। मृतकों में कुण्डा थाना क्षेत्र अंतर्गत चांदडीह निवासी दस वर्षीय छोटू कुमार साह, सरकण्डा निवासी स्वास्थ्यकर्मी का पुत्र अजय कुमार लाल (35)व सारवां थाना अंतर्गत बड़हेता गांव निवासी गोविन्द महतो (62) शामिल हैं। घायलों में मृतक छोटू की मां प्रेमा देवी एवं बसमाता, चांदडीह गांव निवासी कारू यादव शामिल है।ड्ढr सेल में हुआ विलयड्ढr बोकारो। सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान बीआरएल का सेल में विलय हो गया। विलय की प्रक्रिया सोमवार को सेल के निदेशक कार्मिक जी ओझा एवं बीआरएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक कुमार जितेन्द्र सिंह ने नई दिल्ली में हस्ताक्षर कर पूरी की। हस्ताक्षर के बाद विलय संबंधी फाइल मिनिस्टरी ऑफ कंपनी एफेयर्स के पास भेज दी गयी।ड्ढr जगरनाथ रफरड्ढr तेनुघाट। तेनुघाट उपकारा में बंद डुमरी विधायक जगरनाथ महतो को सोमवार को तेनुघाट कोर्ट ने बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल ले जाने की अनुमति प्रदान कर दी। तेनुघाट उपकारा के अधीक्षक रमेश प्रसाद ने बताया कि जेल डाक्टर के जांच प्रतिवेदन के आधार पर बोकारो सिविल सर्जन द्वारा मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था।ड्ढr 27 को झारखंड बंदड्ढr जामताड़ा। झारखंड दिशोम पार्टी ने आदिवासी हासा-भाषा को बचाने के लिए 27 अक्तूबर को झारखंड बंद किया है। श्री मुमरू ने 27 नवंबर को रांची में आयोजित आदिवासी महाधरना में एक लाख से अधिक लोग शामिल होंगे।ड्ढr श्री मुमरू ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री जामताड़ा से उपचुनाव लड़ते हैं तो झारखंड दिशोम पार्टी भी उम्मीदवार देगी। इस अवसर पर संथाल परगना प्रमंडलीय अध्यक्ष सुबोधन टुडू, जिलाध्यक्ष मंगल सोरन, जिला उपाध्यक्ष रामलाल मार्डी उपस्थित थे।ड्ढr चल बसा पेट्रोल पंपकर्मीड्ढr मेदिनीनगर । रतनलाल पेट्रोल पंप पर रविवार की रात्रि हुई गोली चालन में घायल पेट्रोल पंपकर्मी मनोज गुप्ता की सोमवार सुबह मौत हो गयी। इससे भड़के पेट्रोल पंपकर्मी सोमवार को हड़ताल पर चले गये।ड्ढr शहर के सभी पेट्रोल पंप अपराह्न् तीन बजे तक बंद रहे। पेट्रोल पंप कर्मचारी सुरक्षा की मांग कर रहे थे। बाद में एसपी के आश्वासन के बाद रतनलाल पेट्रोल पंप को छोड़ सभी पेट्रोल पंप खुले। ड्ढr विजयादशमी को बंटते हैं गुड़ से बने लड्डू निज प्रतिनिधि जामताड़ा दुर्गा पूजा में गुड़ के लड्डू की एक अलग पहचान है। बंगाली समुदाय आदिकाल से इस परंपरा को आज भी बचाये हुए है। पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जामताड़ा जिला पूर्व में पश्चिम बंगाल का हिस्सा था। नाला एव कुण्डहित क्षेत्र उस समय बंगाल के रूप में जाने जाते थे। बंगाली कलचर एवं रहन- सहन का तरीका आज भी उसी सांचे में ढला हुआ है। बंगाली समुदाय अपन परंपराओं को आज भी सहेो हुए है। जो पर्व त्योहार एवं खास मौकों पर देखने को मिलती है। इनमे से ही यह परंपरा भी एक है। विजयादशमी के दिन बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करने की परंपरा है। इसी दिन बंगाली परिवार दशमी के मौके पर आगे वाले आंगंतुको का स्वागत गुड़ के लड्डू से करते हैं। चाहे वह गरीब से गरीब परिवार हो या अमीर क्यों न हो। दुर्गा पूजा में गुड़ के लड्डू आज भी बनाये जाते हैं। चने का आटा, सरसों का तेल एवं गुड़ से कारीगर लड्डू बनाते हैं।ड्ढr दुर्गा पूजा में बनने वाले गुड़ के लड्डू सगे संबंधियों को भेजने का रिवाज है। सात समंदर पार बसे प्रियजनों को विजया दशमी का गुड़ का लड्डू भेजा जाता है। रावण दहन होगा निषेधाज्ञा हटी बोकारो। चास के एसडीओ केएन झा ने सोमवार को रावण दहन कार्यक्रम स्थल पुस्तकालय मैदान पर लगी निषेद्याज्ञा हटा ली। इसके साथ ही रावण दहन सह विजयादशमी उत्सव की तैयारी तेज हो गयी है। दो दिन पूर्व एसडीओ ने रावण दहन कार्यक्रम स्थल पर धारा 144 लागू कर किसी तरह की तैयारी पर प्रतिबंध लगा दिया था। दूसर पक्ष द्वारा आवेदन वापस लिये जाने के बाद एसडीओ ने धारा 144 हटाने की घोषणा की। रारप्पा में मां को चढ़ता है खीर का भोग अमरनाथ पाठक हाारीबाग जीवनदायिनी माता कभी किसी जीवन की बलि नहीं मांग सकतीं। इन बातों को अंगीकार करते हुए झारखंड के कई देवी मंडपों में थम गयी दशहर में बलिदान देने की प्रथा और माता विशुद्ध वैष्णवी बन गयीं। सुप्रसिद्ध देवी स्थल रारप्पा में भले ही बकर की बलि का रिवाज हो, लेकिन वहां मां छिन्नमस्तिके मंदिर में बलिदान मस्तक को नहीं चढ़ाया जाता। वहां दोपहर और सांध्य दो बेला खीर का महाभोग चढ़ाया जाता है। इसी प्रकार गोला के दो मंडपों बाबू दुर्गा मंदिर में डेढ़ सौ वर्ष और स्वर्णवनिक दुर्गा मंदिर में 75 वर्षो की बलिप्रथा को पागल राघवानंद बाबा ने बदल डाला। पं. प्रभाकर मिश्र बताते हैं कि बाबा दोनों मंदिरों में बलि रिवाज खत्म कराने धरने पर बैठ गये और अंत में खुद के जीवन को त्यागने की चेतावनी दे डाली। बस भक्तों ने हथियार डाल दिये और बंद हो गयी बलिप्रथा। पिछले कई वर्षो से इन मंडपों में माता वैष्णवी की पूजा होती है, कहीं कोई प्रकोप और संताप नहीं हुआ। हाारीबाग के बानाहप्पा मंडप में भी 55 वर्षो से बलि का रिवाज था। एक रात माता के अनन्य भक्त कुंवर गोपाल सिंह को सपने में मां दुर्गे ने बलि बंद करने को कहा। पिछले तीस वर्षो से वहां माता वैष्णवी की पूजा होती है। केरडारी कंडाबेर में तीन सौ वर्ष पुराने मां अष्टभुजी मंदिर में पिछले पंद्रह साल से बलिप्रथा बंद है। टाल दुर्गापूजा समिति में दो सौ वर्ष पुराना रिवाज समाप्त हुआ और बिना विघ्न के पिछले कुछ साल से माता को भोग चढ़ाया जाता है। ड्ढr ं

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