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.. हमें रिटायरमेंट दे दो

‘तुम्हें अपनी नौकरी मुबारक हमें रिटायरमेंट दे दो।’ बाजार समिति की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध एक दर्जन से अधिक वरीय अधिकारियों ने सरकार से ‘परमानेंट छुट्टी’ मांगी है। बुढ़ापा में फिर से नई नौकरी शुरू करने की जलालत से बेहतर उन्होंने नौकरी छोड़ने को बेहतर माना है। कई तो 34 वर्षो की सेवा के बाद गजटेड ऑफिसर से बाबू बनाए जाने पर दुखी दूसर विभागों में जाने की बजाए रिटायर होकर नई पाली शुरू करना चाहते हैं। सरकारी शर्तों और बंदिशों से मात खाने के बाद इनके लिए अब उम्मीदों के सार दरवाजे बंद हो चुके हैं।ड्ढr ड्ढr उधर बाजार समिति में दोहर मापदंड का खेल फिर शुरू हो गया है। एक ओर तो कर्मचारियों को नई नियुक्ित के नाम पर हाकिम से बाबू बनाया जा रहा है तो दूसरी ओर कुछ खास लोगों को हाकिम भी बनाया जा रहा है। एक ओर कर्मचारियों से उनके अधिकार छीने जा रहे हैं तो चहेतों को वित्तीय और प्रशासनिक शक्ित प्रदान की जा रही है। नए आदेश के तहत बाजार समिति में प्रतिनियुक्त कर्मचारियों में ‘लेखा पदाधिकारी’ को ‘कंट्रोलर’ का दायित्व दिया गया है जबकि ‘अंकेक्षक’ को ‘अंकेक्षण पदाधिकारी’ और ‘लेखा पाल’ को ‘लेखा पदाधिकारी’ बना दिया गया है। इन्हें ‘पूर्व’ की भांति आवंटित वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्ित प्रदत्त की गई है। जबकि तमाम एक्जक्यूटिव इंजीनियरों को 25 वर्षो की सेवा के बाद जूनियर इंजीनियर बना दिया गया है। बाजार समिति से दूसर विभागों में भेजे गए सैकड़ों कर्मचारियों को उनके मौजूदा वेतन से आधा भी नसीब नहीं होने वाला है जबकि समिति में लाये गए लोगों की बल्ले-बल्ले है। पणन सचिव (6500-10500) को पंचायत पर्यवेक्षक (5000-8000) बनाने का फरमान है।ं

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