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निदेशक आयुव्रेद कोर्ट में तलब

सेवा के बावजूद वेतन भुगतान न करने की विभागीय कार्यवाही के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने 14 अक्तूबर को निदेशक आयुव्रेदिक एवं यूनानी सेवा उ.प्र. को व्यक्ितगत रूप से तलब कर पूछा है कि इस बाबत क्यों न उन पर हर्जाना ठोका जाए?ड्ढr न्यायमूर्ति प्रदीपकान्त व न्यायमूर्ति वी.डी. चतुव्रेदी की खण्डपीठ के सम्मुख मो. यूनुस व नरन्द्र बहादुर सिंह की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिका पर वकील कुलपति त्रिपाठी की दलील थी कि याचीगणों ने राजकीय आयुव्रेदिक चिकित्सालयों में 23 व 15 जुलाई को बतौर चीफ फार्मासिस्ट के पद पर कार्यभार ग्रहण किया था। उनकी सेवाओं के बावजूद विभाग की ओर से उन्हें वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उधर कई आदेशों के बावजूद उपस्थित न होने पर अदालत ने येष्ठ पुलिस अधीक्षक के जरिए 13 अक्तूबर को क्षेत्राधिकारी हजरतगंज को लूट के एक मुकदमे की केस डायरी सहित तलब किया है। मुख्य न्यायिक मजिस्टट्र डॉ. बालमुकुन्द की अदालत में वादी जनार्दन बाजपेई के विशेष वकील के.के. मिश्रा का आरोप था कि इस मामले में विवेचक की ओर से खास रुचि नहीं ली जा रही है। लचर पैरवी के चलते अभियुक्तों के हौसले बुलन्द हैं। वकील ने कहा कि अवर न्यायालय विवेचना की ‘मानीटरिंग’ कर सकता है।

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