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मां के दर्शन को उमड़ा सैलाब

नवरात्र में बारिश की बूंदें छम से क्या पड़ीं, उत्साह का सुरूर दोगुना हो गया और हाारों पांव पंडालों की ओर उमड़ पड़े मां भगवती के दर्शन को। सप्तमी के विधान की ओट में शहर यात्रा किसी शुभ मुहूर्त की सारी सीमाएं लांघकर वामन के डग भरने का संकल्प कर चुकी है। टाट से लेकर प्लाई के पंडाल तक, अजंता का महल हो या भूतमहल का दीदार, उज्जन के महाकाल मंदिर के दर्शन की इच्छा हो या कांच और मोतियों की कारीगरी- रातभर यात्रा अपने शबाब पर है। पूरा शहर एक है। पड़ोसियों, मित्रों, अपनों के साथ गलबहियां डाले सारा शहर झूम रहा है। मां अट्टालिकाओं में विराजी हैं, दिल की धड़कन थामे नहीं थम रही। कोई भूतमहल देखना चाहता है, तो कोई लाइटिंग कैमर में कैद करने को उत्सुक है। हर ओर रलम-पेल है। देह से देह छिल रही है। रत्ती भर भी पांव रखने की जगह नहीं। युवा दिलों की मस्ती उफान पर है।ड्ढr यह चार दिनी नवरात्र का अनोखा सुअवसर है, जिसके लिए बग्घियों की जरूरत नहीं। यहां हर कोई अपने मन का राजा है। हर किसी के पांवों में मानो पर लग गये हैं। यह आलम खुद ही हाार रंगों की विरासत के साथ मौजूद है। शहर का कोना-कोना भक्ित रस में डूबा हुआ है। चाट-गोलगप्पेवालों, चाऊमीन और खिलौने वालों की पौ बारह है। अपने जमा किये पैसे के नेग से बच्चे वह हर खुशी हासिल कर लेने को ख्वाहिशमंद हैं, जिनके लिए उनकी मांएं अकसर टोकती रही हैं। लड़कियां माडर्न ड्रेसेज में ग्रुप में या फिर अपने रिश्तेदारों के साथ रात का सारा वैभव लूट रही हैं। दूर-दराज से आये लोग इस चकाचौंध में डूबे हुए हैं। सारा शहर एक अजीब अलमस्ती में कैद है।

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