DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अंशकालिक कर्मी भी लाभ के भागी

मात्र 130 रुपये माहवार की नौकरी करने वाले एक व्यक्ित को आखिर इंसाफ मिला। उसकी कंपनी ने उसे 1साल पहले नौकरी से निकाल दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने लंबे चले इस मुकदमे में संबंधित कंपनी को न सिर्फ उसका रोगार लौटाने, बल्कि इस समूची अवधि का वेतन व अन्य लाभ देने के भी निर्देश दिए। शंकरलिंगम वर्ष 1में न्यू इंडिया इंश्यौरंस कंपनी में बतौर स्वीपर-कम-वाटरमैन नियुक्त हुआ था। तीन साल बाद जब उसने खुद को रगुलर करने की मांग की तो कंपनी ने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया। जस्टिस तरुण चटर्ाी की खंडपीठ ने इस मामले में दिए गए अपने ताजा फैसले में कहा है कि कोई भी कामगार यदि वह पार्ट-टाइम है या फुल-टाइम, उसने यदि साल में 240 दिन निरंतर डय़ूटी की है तो वह नियमित नौकरी के तमाम लाभों का हकदार है। उसे औद्योगिक विवाद कानून की धारा 25 एफ के प्रावधानों के तहत नौकरी से हटाया नहीं जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि इस सेक्शन के तहत ऐसा कर्मचारी जिसे कम करते हुए सालभर न हुआ हो, उसे भी एक माह का लिखित नोटिस दिए बगैर निकाला नहीं जा सकता। ऐसे किसी नोटिस में बाकायदा हटाए जाने का कारण बताना होगा और कर्मचारी को नोटिस पीरियड का वेतन भी देना होगा। शंकरलिंगम के हक में दिए गए इस महत्वपूर्ण फैसले से सैकड़ों पार्ट-टाइम कर्मचारियों को नई संजीवनी मिलेगी। अदालत ने कहा है कि औद्योगिक विवाद कानून के तहत कामगार की परिभाषा में पार्ट-टाइम और फुल-टाइम का कोई भेद नहीं किया गया है। इसमें कहीं नहीं कहा गया है कि जो फुल-टाइम है, सिर्फ वही कामगार की श्रेणी में आता है। शंकरलिंगम को कंपनी ने पार्ट-टाइम कर्मचारी के तौर पर 130 रुपये प्रतिमाह के वेतन पर नियुक्त किया था। करार के मुताबिक उसे दो घंटे ड्यूटी करनी थी। लेकिन उससे पांच-पांच घंटे काम लिया जाता था।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: अंशकालिक कर्मी भी लाभ के भागी