DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

स्वीकृत फंड नहीं निकला कुआं खुदा पर पानी नहीं

राशि की स्वीकृति दी गयी पर ट्रेारी से नहीं निकली। जब पैसे नहीं मिले, तो बिजली की आपूर्ति नहीं हो सकी। जलापूर्ति के लिए कुआं खुदवाया गया, लेकिन पानी नहीं निकला। राज्य में महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का कुछ ऐसा ही हाल है।ड्ढr पूर्ववर्ती अजरुन मुंडा सरकार के कार्यकाल में गोकुल ग्राम परियोजना की स्वीकृति दी गयी थी। चाकुलिया प्रखंड के मुढ़ाल गांव में यह प्रोजेक्ट 2006-2007 में ही पूरा हो गया, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में ग्रामीणों के लिए प्रारंभ नहीं हो सका। बिजली की आपूर्ति तथा जलापूर्ति के अभाव में प्रोजेक्ट यूं ही पड़ा है। यह मामला तो मुढ़ाल गांव का है और भी जगहों पर गोकुल परियोजना दम तोड़ रही है। मुढ़ाल गांव प्रोजेक्ट के लिए बिजली की व्यवस्था को सरकार ने राशि की स्वीकृति भी दे दी, लेकिन ट्रेारी से राशि की निकासी नहीं हो सकी। कुआं खुदने के बाद भी पानी नहीं निकला। अब पशुपालन विभाग इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर रहा है। मंत्री का कहना है कि योजना को चालू करने के लिए चालू वित्तीय वर्ष में सभी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करा दिये जायेंगे। लेकिन वित्तीय वर्ष के छह महीने बीतने के बाद भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी।ड्ढr विस में डॉ दिनेश षाड़ंगी ने यह मामला उठाया था। डॉ षाड़ंगी का कहना है कि महत्वपूर्ण योजनाओं पर यूपीए सरकार का ध्यान नहीं है। यह सरकारी तंत्र की नाकामी भी है। गौरतलब है कि ग्राम स्तर पर दूध उत्पादन-संग्रहण तथा कोल्ड चैन की स्थापना के मकसद से ही इस प्रोजेक्ट का कंसेप्ट तैयार किया गया था। इसके साथ ही दूध उत्पादकों को प्रशिक्षण, हरा चारा, उत्पादन का विकास तथा मिल्क प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए आवश्यक इनपुटस् का वितरण भी करना है। चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए 2.8 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: स्वीकृत फंड नहीं निकला कुआं खुदा पर पानी नहीं