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ेंभीड़ से मां का आंगन पटा

गुरुवार की विदाई के पूर्व सिद्धिदात्री मां भवानी का आंगन शरद की पूरी आभा के साथ रािंत है। महागौरी पूजन के लिए डलिया में धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प लिये भक्तों, सुहागिनों और कुआंरियों के हुाूम से मां का आंगन ऐसा पटा कि भक्त-भगवान के बीच सिर्फ आस्था रह गयी, सारी सत्ता दूसरी ओट चली गयी थी। मां सिंदूरी रंग में रंग गयीं और मंत्रोच्चार की ध्वनियां अगर की सुगंध के साथ पूरी फिाां में घुली हुई थी।ड्ढr शुभ मुहूर्त में नवरात्र के नौ रूपों में विराजी मां का संपूर्ण श्रंगार एक नजर देख लेने की आकांक्षा के बीच लोगों का हुाूम आशीष मांगने उमड़ रहा है। बुधवार को सिद्धिदात्री देवी की संधि बलि के बाद मां की विदाई की बेला शुरू हो जायेगी। अपने पीहर में आयी मां का सिंदूरखेला के साथ औरतें विदाई देंगी और कलश में रखे पात्र में मंत्रों से पूरित जल का घर-घर में शांति अभिषेक होगा। आम्र के भीगे पल्लवों को अपने सिर पर एक बार उलीच लेने को उन्मत भवानी के भक्त साल भर अपने लिए सुख-शांति और पूरित भंडार की कामना से आबद्ध होंगे। फिलहाल सारा शहर रात-दिन सड़कों पर या तो मां का रूप आंखों में भर लेने का आकांक्षी बना घूम रहा है या फिर घर से बाहर तक नवरात्र के विधानों में लोगों की दिनचर्या सिमटी हुई है। मां के आगमन के साथ एक सामाजिकता रच-बस गयी है। लोगों का मिलना-ाुलना हो रहा है, रिश्ते तय हो रहे हैं, देखा-देखी चल रही है, बच्चों के नये दोस्त बन रहे हैं, कई दिन के बिछड़े किलकारियां मार कर गले मिल रहे हैं। चाट-चाउमीन, सॉफ्टी और खिलौनों की दुकानों में बच्चों का मचलना आम है। रात भर मित्रों के साथ गप-शप और पूजा के उल्लास में रमा है शहर। गाड़ियों का रला है, सड़क जाम है, छीना झपटी है, छेडख़ानियां हैं, मजलिस है, वाद-विवाद का आलम है। देर रात तक जगमगाते शहर में अल्लसुबह तक किस्से पर किस्से बन रहे हैं। चैनो-सुकून के साथ नवरात्र के चार दिनों का सारा उल्लास मां की विदाई के साथ थम जायेगा। फिर नयी करवट लेकर जागेगा शहर, अधखुली आंखों से।

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