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अब मुकाबला सोनिया बनाम राहुल गांधी

उत्तर प्रदेश में रायबरेली सीट से प्रत्याशी एवं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पड़ोस की अमेठी सीट से कांग्रेस महासचिव और उनके पुत्र राहुल गांधी में मुकाबला अब इस बात का है कि कौन यादा बड़े अंतर से जीत हासिल करेगा। दोनों संसदीय क्षेत्र में एक समानता यह है कि दोनों नेहरू-गांधी परिवार की परंपरागत सीट है। अमेठी को दिवंगत संजय गांधी और राजीव गांधी ने अपनाया और उनकी विरासत को राहुल गांधी ने आगे बढ़ाया तो रायबरेली सीट फिरोज गांधी, इंदिरा गांधी, उनकी मामी शीला कौल अरुण नेहरू के बाद अब सोनिया गांधी इस विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। अमेठी में पिछले 23 अप्रैल को मतदान हो चुका है, जबकि रायबरेली में आगामी 30 अप्रैल को मतदान होना है। अमेठी और रायबरेली सीट पर कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी बढ़ेरा पिछले दो चुनाव से कमान संभालती रही हैं। राहुल गांधी को रिकॉर्ड मतों से जीत दिलाकर उनका नाम गिनीज बुक में दर्ज कराने की हसरत पाले प्रियंका अब रायबरेली में उसी करिश्में की आस से आई हैं। प्रियंका से अमेठी में यह सवाल भी उठाया गया कि वह अपनी मां और भाई के लिए ही प्रचार करती हैं। दोनों की जीत में कोई शक नहीं लेकिन किसका नाम वह गिनीज बुक में चाहती हैं। छूटते ही उनका जवाब था भाई राहुल का। प्रियंका का प्रचार अब पूरी तरह से रायबरेली में चल रहा है। अमेठी में मात्र 45 प्रतिशत हुए मतदान ने गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने की उम्मीदों पर पानी फिर गया जान पड़ता है, इसीलिए वह अब यही करिश्मा यहां करने की उम्मीद पाले बैठी हैं। मतदाताआें से उनकी एक ही अपील है कि अपने मत का इस्तेमाल करो और उसका महत्व समझो। पार्टी कार्यकर्ताआें को भी यही हिदायत दी जा रही है कि यादा से यादा मतदाताआें को मतदान केन्द्रों तक भेजा जाए ताकि मत प्रतिशत बढ़े तो जीत का अंतर भी बढ़ जाए। अमेठी के कम मतदान से प्रियंका पूरी रात सो नहीं सकी थीं और उनकी रात जागते हुए एंव बिस्तर पर करवट बदलते बीत गई थी। वह नहीं चाहतीं कि रायबरेली में भी कम मतदान हो और उन्हें फिर से अपने रात की नींद गंवानी पड़े। सोनिया गांधी ने रायबरेली में अपनी सभा में विपक्षियों खासकर बसपा प्रमुख एवं मुख्यमंत्री मायावती पर जम कर हमला बोला। गांधी ने मायावती को रायबरेली में हुए विकास का आईना भी दिखाया और मतदाताआें के सामने फिर उस बात को रखा कि कैसे राय सरकार ने प्रस्तावित रेल कारखाना लगाने के मामले में अडंगा लगाया। रायबरेली में रेल कोच कारखाने के लिए केन्द्र सरकार को अदालत की शरण लेनी पड़ी। अदालत के आदेश के बाद राय सरकार ने देने के बाद वापस ले ली जमीन रेल मंत्रालय के हवाले की। अमेठी के साथ रायबरेली संसदीय क्षेत्र में भी धर्म, जाति और समुदाय कोई मायने नहीं रखते। नेहरु गांधी परिवार का प्रतिनिधित्व होने के कारण इस संसदीय क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व मिलता है और इस क्षेत्र के मतदाता नेहरु गांधी परिवार को कभी छोड़ नहीं पाते। लोकसभा चुनाव का इतिहास गवाह है कि इस संसदीय सीट से जब कभी नेहरु गांधी परिवार का कोई सदस्य प्रत्याशी नहीं रहा तब ही मतदाताआें ने किसी दूसरे के तरफ रुख किया। इस मामले में अपवाद सिर्फ 1और 1ा चुनाव था। आपातकाल को लेकर लोगों में गुस्सा था और इंदिरा गांधी को समाजवादी नेता राज नारायण ने हरा दिया था। इसी तरह अयोध्या लहर को लेकर भारतीय जनता पार्टी के अशोक सिंह कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा को हरा कर चुनाव जीत गए थे। नहीं तो अभी तक गांधी नेहरु परिवार का कोई भी सदस्य यहां से चुनाव नहीं हारा। लोकसभा के लिए 1े पहले चुनाव से 1तक हुए तीसरे चुनाव तक पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। उनके निधन के बाद इंदिरा गांधी 1और 10 के चुनाव में इस सीट से जीतीं और देश की प्रधानमंत्री भी बनी। ड्ढr इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1में हुए चुनाव में अरुण नेहरू तथा 1और 1े चुनाव में इंदिरा गांधी की मामी शीला कौल को यह सीट मिली। लोकसभा के 1में हुए चुनाव में गांधी परिवार के करीबी सतीश शर्मा इस सीट से जीते। सोनिया गांधी जब सक्रिय राजनीति में आईं तब लोकसभा में जाने के लिए उन्होंनें यही सीट चुनी। लोकसभा के पिछले चुनाव में वह इस सीट से जीतीं लेकिन लाभ के दोहरे पद के आरोप पर उन्होंनें लोकसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। उनके त्यागपत्र देने के बाद हुए उपचुनाव में भी उन्हें जीत मिली। इस चुनाव में भी सोनिया गांधी समेत सोलह प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें भाजपा के आरबी सिंह और बसपा के आरएस कुशवाहा भी शामिल हैं, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष का किसी से मुकाबला नहीं है। अपनी जीत सुनिश्चित मान कर ही वह पूरे देश में पार्टी के पक्ष में प्रचार कर पा रही हैं। लाख टके का सवाल फिर वही कि लगभग चौदह लाख मतदाताआें वाला यह संसदीय क्षेत्र क्या सोनिया गांधी का नाम गिनीज बुक में दर्ज करा पाएगा। या प्रियंका गांधी बढेरा यह हसरत पाले अगले चुनाव का इंतजार करेंगी।

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