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पुराने क्वार्टरों की जगह बहुमंजिले फ्लैट बनेंगे

वीवीआईपी को शायद अपने कैम्पस में ताजी हवा के झोंके का मजा नहीं मिले लेकिन दड़बेनुमा क्वार्टरों में रहने वाले सरकारी कर्मचारी अब चैन की वंशी बजायेंगे। राजधानी में सरकारी कार्यालयों की बेकार जमीन, मंत्रियों, विधायकों और अफसरों के जूही, चंपा और चमेली से गमकने वाले लम्बे-चौड़े लॉन में नये कार्यालय बनेंगे। योजना को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी बड़ोदरा की करण ग्रोवर एण्ड एसोसिएट्स को सौंपने की तैयारी है। इस आशय का एक प्रस्ताव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास भेजा गया है।ड्ढr ड्ढr सूत्रों के अनुसार सचिवालय, विधानमंडल, म्यूजियम परिसर, गर्दनीबाग, आर.ब्लॉक, पुनाईचक, शास्त्रीनगर, राजवंशीनगर, लोदीपुर और काजीपुर के साथ हड़ताली मोड़ और हाईकोर्ट के बीच के सरकारी आवासीय इलाकों की सेटेलाइट और हेलीकॉप्टर से ली गयी तस्वीरों का बारीकी से विश्लेषण कर अब जर्जर-पुराने क्वार्टरों की जगह नये कतारबद्ध बहुमंजिले फ्लैट बनाने का प्रस्ताव है। इससे अधिकाधिक कर्मियों को आवास मिलेंगे। फिलहाल गर्दनीबाग, आर.ब्लॉक, शास्त्रीनगर और राजवंशीनगर में सचिवालयकर्मियों के लिए मात्र 2300 क्वार्टर हैं। विधायकों के लिए एक समान सुविधा वाले मकान बनाने पर विचार हो रहा है। दूसरी ओर वीवीआईपी आवासीय परिसरों के लॉन का आकार घटाकर वहां सरकारी कामकाज निपटाये जायेंगे। विधानमंडल के संयुक्त सत्र के लिए एक नया भवन और मीठापुर ‘एजुकेशनल जोन’ में छात्रों के लिए इंडोर स्टेडियम और पार्क बनाने का प्रस्ताव है। सचिवालय के बैरकों की भी दशा सुधरगी। योजना के पीछे तर्क यह है कि आबादी और सरकारी-व्यापारिक गतिविधियों में बढ़ोतरी के लिहाज से पटना में उपलब्ध जमीन के बेहतरीन उपयोग के अलावा दूसरा विकल्प ही नहीं है। मुख्यमंत्री 1, अणे मार्ग की जमीन का एक-एक हिस्सा औषधीय पौधों की खेती और एनेक्सी के लिए देकर अपना इरादा पहले ही जता चुके हैं। अब सीएम सेकट्रेरियट (फोर केजी) की खाली जमीन पर भी एक नया कार्यालय बन रहा है।

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