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अभी पीएम के लायक अनुभव नहीं : राहुल

ांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि अगर उन्हें अभी प्रधानमंत्री पद की पेशकश की गई तो वह उसे ठुकरा देंगे, क्योंकि वह पार्टी में बदलाव लाने में व्यस्त हैं और इस सर्वोच्च पद के लिए उनमें अनुभव की कमी है। राहुल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं दो कारणों से इंकार करुंगा..पहला यह है कि मैं कांग्रेस पार्टी के संगठन स्तर पर काम कर रहा हूं। यह जरूरी है कि गरीबोन्मुखी युवा कांग्रेस का संगठन विकसित हो।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं नहीं समझता कि मुझमें फिलहाल इतना है अनुभव है कि मैं देश का प्रधानमंत्री बन सकूं। मेरे पिता की बात और थी।’’ राहुल युवा कांग्रेस के प्रभारी हैं और उनकी योजना है कि नेताओं का चयन सदस्यों के माध्यम से करवाकर उसे ज्यादा लोकतांत्रिक बनाया जाए। यह प्रयोग पंजाब में किया जा चुका है और इसे देश भर में दोहराने के लिए उन्होंने दो साल की समय सीमा रखी है। उनके पिता राजीव गांधी 1में 40 साल के थे जब उनकी माता एवं देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो जाने की वजह से उन्हें देश की कमान संभालनी पड़ी। राहुल जून में 3साल के हो जाएंगे। यह पूछने पर कि क्या राजनीति में उनके होने से कांग्रेस के वंशवादी होने की बात पुख्ता होगी राहुल ने पलटकर कहा, ‘‘मनमोहन सिंह गांधी परिवार के नहीं हैं और वह प्रधानमंत्री हैं।’’ राहुल ने कहा, ‘‘आप मुझे गांधी के रूप में देखते हैं..मैं उसे बदल नहीं सकता। मैं गांधी परिवार से हूं। वे मेरे माता-पिता और दादा-दादी हैं।’’ उन्होंने इस दौरान पश्चिम बंगाल की वाम सरकार पर भी हमला बोलते हुए जोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार विकास के फायदों को गरीबों तक पहुंचाने में विफल रही है, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने कम्युनिस्ट पार्टियों की आर्थिक नीति की आलोचना की। वामपंथियों द्वारा तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी को विकास विरोधी करार दिए जाने पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ममताजी के बारे में इस तरह की टिप्पणी करना वामंपथियों के लिए आसान है, पर सच यह है कि वामपंथ की आर्थिक नीति सही नहीं है।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘इन नेताआें के पास विकास को लेकर आदर्श नीति नहीं है। मैं समझता हूं कि विकास को लेकर संतुलन बनाए रखने की जरूरत होती है। हमारे पास गरीबों के लिए एक से बढ़कर एक उम्दा कार्यक्रम हैं। राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना उन्हीं में से एक है। ऐसे कार्यक्रमों से गरीबों को लाभ पहुंचाए की जरूरत है, पर मेरा मानना है कि इस मामले में यहां की वामपंथी सरकार असफल रही है।’’ राहुल ने कहा कि वामपंथी सरकार गरीबों तक विकास के लाभ पहुंचाने में असफल रही। उन्होंने कहा, ‘‘वामपंथी सरकार उदारीकरण के मोर्चे पर काफी धीमी है।’’ड्ढr

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