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शिक्षा विभाग के निर्णय पर उठ रही उंगली

वर्षो से बहाली नहीं होने का तर्क देकर ट्रंड शिक्षकों को तो उम्र सीमा में छूट दी गई। मगर इसी तरह के मामले में पुस्तकालयाध्यक्षों के नियोजन में कोई रियायत नहीं दी गई है। इस बाबत शिक्षा विभाग के एक तरफा निर्णय पर उंगली उठ रही है। विसंगति को लेकर इस पद के अभ्यर्थियों ने विभाग के खिलाफ अदालत जाने का मन बनाया है। यदि मामला सिर चढ़ा तो दूसर चरण के शिक्षकों की बहाली के साथ ही चिह्न्ति हाई स्कूलों में होने वाले कुल 25पुस्तकालयाध्यक्षों के नियोजन पर अनिश्चितता के बादल छा सकते हैं।ड्ढr ड्ढr गौरतलब है कि प्रशिक्षित पुस्तकालय विज्ञान संघ के सदस्यों द्वारा मामला उठाए जाने पर प्रधान शिक्षा सचिव अंजनी कुमार सिंह संशोधित नियमावली, 2008 का हवाला देते हुए पुस्तकालयाध्यक्षों की बहाली में अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में रियायत दिए जाने से इंकार कर चुके हैं। दूसरी तरफ बताया जाता है कि विभाग संबंधित नियमावली में इस बार में उचित व्यवस्था नहीं किए जाने की अपनी चूक तो मान रहा है मगर तीर कमान से निकल चुका है इसलिए उससे कुछ करते नहीं बन रहा है। वैसे नियमावली तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले एक अधिकारी पर भी उंगली उठ रही है। निदेशालय के धिकारियों के बीच चल रही चर्चाओं पर गौर करं तो अधिसूचना जारी करने से पहले ही नियमावली बनाने वालों को यह सूझना चाहिए था। मगर अब कोई भी नया प्रावधान जोड़ने का मतलब है कि नए सिर से पूरी कसरत दुहरानी होगी। इस मुद्दे पर संघ के सदस्यों का तर्क है कि पहले और दूसर-दोनों चरणों में प्रशिक्षित शिक्षकों के लिए उम्र सीमा का बंधन नहीं रखा गया जबकि 15 वर्षो में पहली बारड्ढr होने वाली पुस्तकालयाध्यक्षों की बहाली में उम्र सीमा की तलवार लटका दी गई है।ं

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