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महादलित आयोग को असंवैधानिक करार दिया

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने बिहार में सत्तारूढ़ नीतीश सरकार को तगड़ा झटका देते हुए दो टूक कहा है कि उसके द्वारा गठित महादलित आयोग पूरी तरह से असंवैधानिक है। एनसीएससी की दलील है कि राज्य सरकार को आरक्षण को श्रेणियों (डीकेटोगराइड) में बांटने का अधिकार नहीं है। लोकसभा और कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर एनसीएससी के इस फैसले को लेकर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया होने की संभावना है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सितंबर 2007 में महादलित आयोग का गठन किया था। इसमें अनुसूचित जाति के 22 जातियों में से 18 को शामिल किया गया था। पासवान, पासी, धोबी और चमार को महादलित की सूची से बाहर रखा गया था। कुछ दिनों पहले बूटा सिंह की अध्यक्षता में हुई एनसीएससी की पूर्ण बैठक में बिहार सरकार के इस मनमाने फैसले पर गंभीर आपत्ति प्रकट की गई। बैठक में कार्मिक और प्रशिक्षण, गृह मंत्रालय, समाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। यह आम राय थी कि अगर बिहार सरकार दलितों का उत्थान चाहती है तो उसे राज्य स्तर पर अनुसूचित जाति आयोग का गठन करना चाहिए।

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