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ासिंगुर से साणंद पहुंची नैनो

वाम-ममता झमेले से मुक्त होकर रतन टाटा की सपनों की नैनो मोदी लैंड में अहमदाबाद से 30 किमी दूर साणंद के छारोड़ी में पहुंच गयी है। मोदी ने टाटा को 1100 एकड़ जमीन दी है, जमीन टाटा के कब्जे में भी आ गयी। नैनो प्लांट पर टाटा दो हाार करोड़ रुपये लगायेंगे।ड्ढr साणंद में सुविधा के विकसित होने तक उत्तराखंड के पंतनगर और पुणे से बाजार में नैनो आयेगी। टाटा और गुजरात सरकार की ओर से मंगलवार को करार पर दस्तखत हुए। टाटा की ओर से एमडी रविकांत और गुजरात के उद्योग सचिव ने नरंद्र मोदी और रतन टाटा की मौजूदगी में हस्ताक्षर किये। परियोजना को मोदी ने महा पूंजी निवेश और कंपनी के आगमन से कहीं अधिक राष्ट्रीय भावना से जुड़ी परियोजना बताया और कहा कि गुजरात में टाटा की ओर से नये अध्याय की शुरुआत हुई है। रतन टाटा ने कहा, ‘साणंद से ढाई लाख नैनो तैयार होगी और हम गुजरात के दोस्ताना माहौल में काम करंगे। हम नये घर में आ गये हैं। टाटा ने सिंगुर को दुखद अध्याय बताया। उन्होंने कहा- सिंगुर परियोजना के कर्मियों को साणंद में से जगह मिलेगी। नरंद्र मोदी ने कहा कि साणंद में नैनो के साथ इससे जुड़े 60 सहायक उद्योग भी स्थापित होंगे।ड्ढr बैड एम,गुड एम : नैनो के सिंगुर से साणंद आने में टाटा को दो एम देखने को मिले। बैड एम और गुड एम। जब टाटा से मोदी और ममता के बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि देयर आर बैड एम्स गुड एम्स आलसो। उन्होंने न तो ममता का नाम लिया और न ही मोदी का।ड्ढr साणंद से टाटा का रहा है रिश्ता : मोदी ने टाटा को जो जमीन दी है उसका रिश्ता टाटा घराने से पहले से रहा है। साणंद तालुके में छारोड़ी की जो जमीन टाटा को मिली है वहां पशु रखे जाते थे। सन् 100 में अकाल की चपेट में आने के बाद पशुओं की देखभाल के लिए रतन टाटा के दादा जमशेदजी टाटा ने हाार रुपये दान में दिये थे। नैनो के बहाने हो रही हैड्ढr

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