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स्पिन गेंदबाजी ऑस्ट्रेलिया की कमजोर कड़ी

म से कम एक ज्वलंत सवाल, जिस पर भारतीय मीडिया में अंतहीन विचार विमर्श चल रहा था उसका जवाब मिल गया है। सौरभ गांगुली ने इस सीरीज के बाद अपने रिटायर होने की घोषणा कर दी। वह पिछले कुछ वर्षों से भारतीय टीम से अंदर बाहर होते रहे हैं। क्योंकि चयनकर्ता यह तय कर पाने में असफल रहे कि वह उनकी योजना का हिस्सा बन सकते हैं या नहीं। ऑस्ट्रेलिया में एक पूर्व कप्तान के लिए टीम में वापसी कर पाना मुश्किल काम है। लेकिन सौरभ ने पिछले वर्ष यह कमाल कर दिखाया था। गांगुली ने पिछले साल बेहतरीन प्रदर्शन किया था यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। मीडिया एक या दो पारी में असफल होने की खबर रख रहा था। आखिरकार सौरभ के लिए बेहद राहत की बात होगी कि अब उनके सिर पर चयनकर्ताओं की तलवार नहीं लटकी होगी। सौरभ को ईरानी ट्रॉफी के लिए शेष भारत की टीम से क्यों हटाया गया यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। और फिर उन्हें बाद में टीम में क्यों शामिल कर लिया गया ? इससे चयनकर्ताओं का रवैया समझ में आता है। बाएं हाथ के शानदार बल्लेबाज ने अंतत: रिटायरमेंट की घोषणा कर सभी विवादों का पटाक्षेप कर दिया। यह बात तय है कि कोई भी व्यक्ित उनकी जगह नहीं ले सकता। गांगुली को अपनी टीम को एक इकाई के रूप में बदलने के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी टीम ने भारतीय क्रिकेट को अपना भरपूर योगदान दिया। 2001 में जब हम प्रतिद्वंद्वी टीमों की कप्तानी कर रहे थे तो हमार बीच में कुछ मतभिन्नता थी। लेकिन उसके बाद से हमार बीच बेहद सौहार्दपूर्ण रिश्ता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सौरभ के संन्यास की घोषणा के बीच भारत इस सीरीज पर किस तरह फोकस करता है। मुझे नहीं लगता कि इस फैसले के बाद टीम अपना फोकस खो देगी। टीम में काफी अनुभवी खिलाड़ी हैं। यह माना जा रहा है कि दिग्गज भारतीय टीम का सामना करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई टीम में अनुभव की कमी है। इस बात को लेकर बहस हो सकती है कि भारतीय टीम के ज्यादातर खिलाड़ियों का सुनहरा समय अब बीत चुका है। क्या उन खिलाड़ियों के रिफ्लेक्सेस, आई टेक्नीक और मोटीवेशन वही है जिसने उन्हें अतीत में कामयाबी दिलाई। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने भारतीय सरजमीं पर एक भी टेस्ट भले न खेला हो लेकिन वनडे क्रिकेट और आईपीएल के अनुभव के बल पर भारतीय हालातों का लाभ उठाने के लिए तैयार हैं। मुझे लगता है कि स्पिन गेंदबाजी ऑस्ट्रेलियाई टीम की सबसे कमजोर कड़ी है। अगर मेहमानों को स्पिन की मददगार पिच मिलती है तो उनके अनुभवहीन स्पिनरों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि ब्रेट ली, मिशेल जानसन और स्टुअर्ट क्लार्क किसी भी परिस्थिति में विकेट लेने में सक्षम हैं। यह सीरीज काफी संघर्षपूर्ण होने की उम्मीद है। मेरी भविष्यवाणी है कि जो टीम पहला टेस्ट जीतेगी वह सीरीज पर 2-1 से कब्जा कर लेगी।

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  • Web Title: स्पिन गेंदबाजी ऑस्ट्रेलिया की कमजोर कड़ी