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अमीर होने की कीमत चुका रहे हैं अमेरिकी

अमेरिका में राजाराम परिवार की त्रासद घटना ऐसे समय में हुई, जब देश में आर्थिक-उथल पुथल के बीच लोग घर और नौकरी हाथ से जाने की आशंका से भयभीत हैं। इसके अलावा शेयर बाजारों के टूटने से अवसाद, दबाव, चिंता, भय जैसी मानसिक परेशानियों का खतरा बढ़ गया है। वर्जीनिया के वैल्यु आप्शन कंपनी के उपाध्यक्ष रिच पाल का कहना है कि घर से बेदखल होने और आर्थिक संकट को लेकर मानसिक दबाव अकेले कैलिफोर्निया में पिछले वर्ष 200 प्रतिशत बढ़ गया। लॉस एंजिल्स टाइम्स ने कैसर परमानेंट सन प्रांसिस्को मेडिकल सेटर के हवाले से बताया कि अगस्त मे भर्ती होने वाले मानसिक मरीजों की संख्या में दस गुणा बढ़ गई है। इनमे से 60 प्रतिशत मरीजों का कहना है कि वित्तीय संकट के कारण उनकी परेशानी बढ़ी है। अमेरिकन साइकोलोजिकल असन के मंगलवार को जारी एक सर्वेक्षण में पाया गया कि दस में आठ अमेरीकियों का कहना है कि आर्थिक संकट उनके जीवन में दबाव का एक बड़ा कारण है। करीब आधे का कहना था कि अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने का खौफ उन्हें खाता जा रहा है। राजाराम के परिवार द्वारा आत्महत्या और हत्या की घटना से यह कड़वी सच्चाई सामने आ गई है कि वित्तीय संकट निराशा और अवसाद में बदल रहा है। राजाराम एक सफल व्यवसायी थे। पत्नी, तीन बच्चों और सास का राजाराम का हंसता खेलता एक आम शहरी परिवार था। इस मामले की जांच से जुड़े एक व्यक्ित का कहना है कि राजाराम को शेयर बाजार मे जबरदस्त नुकसान सहना पड़ा था। आर्थिक मंदी के दौर में अवसाद और आत्महत्या की घटनाएं बढ़ती हैं। वर्ष 1से 1े दौरान आर्थिक हालात के एक अध्ययन में पता लगा है कि आर्थिक संकट के समय आत्महत्या की घटनाएं औसतन दो प्रतिशत बढ़ी हैं। सुख सुविधापूर्ण जीवनयापन का सपना लेकर अमेरिका आए प्रवासी लोगों की हालत यादा खराब है। ह्यूस्टन की दाया कंपनी की लक्ष्मी परासरण का कहना है कि राजाराम असाधारण रूप से सफल भारतीय प्रवासी भारतीयों में से एक थे, जिन्होंने बहुत कम समय में अमेरिकी सपनों को हासिल कर लिया था। दाया की संस्थापक और परामर्शदाता लक्ष्मी ने कहा कि इस तरह की सफलता के बाद उम्मीदें भी परवान चढ़ती हैं और फिर दबाव भी उसी हिसाब से बढ़ता है।

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