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इन पर पाबंदी क्यों नहीं

विश्वविद्यालय में यौन अपराध पिछले दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के एक प्रोफेसर पर अपनी एक छात्रा का यौन शोषण का आरोप लगा था और इसने विभिन्न अखबारों में सुर्खियां भी बटोरी थी। वास्तव में विश्वविद्यालयी व्यवस्था ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों को खासतौर पर विभाग के शिक्षकों नौकरी देने-दिलाने संबंधी इतने अधिकार दे दिए हैं कि इस अधिकार के प्रयोग के दबाव में किसी भी थोड़ी कम स्वाभिमानी छात्रा को बरगला कर उससे यौन संबंध कायम किया जा सकता है जिसके गवाह केवल वे दोनों हों। कई बार जब उनके बीच की डील वायदानुसार नहीं रहती तो छात्रा द्वारा आरोप लगा दिया जाता है। नुकसान उन छात्राओं का होता है जो ऐसी डील को अपमानजनक मानकर अस्वीकार करती हैं और नौकरी पाने में पीछे रह जाती हैं। शेखर कुंडू, दिल्ली विश्वविद्यालय नेताओं, बहस करो दिल्ली विधानसभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री तो हैं ही, भावी मुख्यमंत्री भी घोषित हो चुके हैं। क्यों न इनके बीच भी अमेरिकी चुनाव की तरह ही बहस का आयोजन किया जाए। और फिर जनता खुद ही तय कर सके कि उनके लिए बेहतर कौन होगा। इस बहस को अगर सभी प्रसार माध्यमों पर दिखाया और सुनाया जाए तो इससे चुनाव प्रचार पर होने वाले खर्च को भी कम किया जा सकता है। नीला अवस्थी, सीलमपुर, दिल्ली दोहरी नीति सरकार ने सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान प्रतिबंधित कर दिया है। यह सकारात्मक कदम है। इस कानून के उल्लंघन पर अर्थदण्ड व सजा का भी प्रावधान है। इससे लगता है कि अब धूम्रपान के लती यहां-वहां धुएं के छल्ले उड़ाते नजर नहीं आएंगे। पर कहीं न कहीं सरकार की नीति में असमंजस है। एक ओर सरकार ने तंबाकू कंपनियों को प्रचार, प्रसार व विस्तार की खुली छूट दी है जो लोगों को धूम्रपान के लिए प्रेरित करती हैं, दूसरी तरफ इस तरह का कानून बना है। इस तरह की दोहरी नीति क्या इस कानून को अमलीजामा पहना पाएगी? भूपेन्द्र रतूड़ी, हरिद्वार भ्रष्टाचार की तरक्की भारत भ्रष्टाचार सूचकांक इंडेक्स के अनुसार 85वें स्थान पर रहा, जबकि पिछले साल 72वें पर था। खबर पढ़कर मन को ठेस पहुंची। देश के नेता इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं जिनके भ्रष्टाचारी आचरण के चलते ही एसी तरक्की हुई है अशोक कुमार सिंगला, मुंडी खरड़

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