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भारतीय ओपनरों को भायी पिच

चिन्नास्वामी स्टेडिम की पिच भारतीय ओपनरों को खूब भायी। जिस पिच पर आस्ट्रेलिया ने सिरीज के पहले टेस्ट की पहली पारी में 430 रन बनाए, उसी पर भारत की सलामी जोड़ी वीरेन्द्र सहवाग व गौतम गंभीर ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक 68 रन जोड़ लिए हैं। दोनों बल्लेबाजों ने आस्ट्रलियाई गेंदबाजों बट्र ली, मिशेल जानसन, स्टुअर्ट क्लार्क व शेन वाटशन को 18 ओवरों तक बिना किसी दिक्कत के खेला। सितम्बर व अक्तूबर में हर बार की तरह इस बार भी बरसात ने खलल डाली। बरसात के कारण अम्पायरों ने करीब दस ओवर पहले ही दूसर दिन का खेल समाप्त कर दिया। वीरन्द्र सहवाग 43 व गंभीर 20 रन बनाकर क्रीज पर जमे हैं। दूसर दिन माइकल हसी सैकड़ा मारकर व जहीर पाँच विकेट लेकर हीरो बन गए। जहीर ने बंगलुरु में अपनी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी की। भारतीय टीम जिस लक्ष्य को लंच तक पूरा करने का मकसद लेकर दूसर दिन मैदान पर उतरी थी। उसे पूरा करने में उसे चाय के बाद 3.5 ओवरों तक इंतजार करना पड़ा। वह आस्ट्रलिया को 430 रनों पर आल आउट कर पाई। लंच के बाद चाय तक का हिस्सा ईशांत शर्मा व चाय के 3.5 ओवर तक का हिस्सा जहीर खान के नाम रहा। ईशांत ने चाय तक शेन वाटसन, ब्राड हेडिन व कैमरॉन ह्वाइट को पैवेलियन वापस भेजा। जहीर ने चाय के बाद अपनी छह गेंदों में बट्र ली, मिशेल जानसन व माइकल ही की गिल्लियां बिखेर दी। पोंटिंग को शायद यह उम्मीद नही थी, इतनी जल्दी आस्ट्रलिया आल आउट हो जाएगी। उन्होंने 500 रनों तक उम्मीद की थी। पहले दिन के नाबाद बल्लेबाज माइकल हसी (46) अपने कप्तान का अनुसरण करते हुए भारतीय गेंदबाजों को आसानी से खेलते रहे। एक-एक गेंद को ऐसा पढ़कर खेला कि कुंबले, भज्जी, जहीर व ईशांत की गेंदबाजी टुकड़ी उन्हें तनिक भी विचलित न कर पाई। लंच के थोड़ी देर बाद उन्होंने चिन्नास्वामी स्टेडियम की पिच पर अपने 26वें टेस्ट का नवाँ शतक भी पूरा कर लिया। उन्होंने जिस अंदाज में अपनी खूबसूरत पारी को शतक पार कराया, स्टेडियम में बैठे दर्शक खड़े होकर देर तक तालियाँ बजाते रहे। बीच में उनका साथ देने आए शेन वाटसन (02) व कैमरॉन ह्वाइट जल्दी-जल्दी आउट हो गए। हाँ, विकेट कीपर ब्रैण्ड हैडिन उनके साथ विकेट पर थोड़ी देर जरूर रुके। दोनों आस्ट्रलिया को 350 रनों तक ले गए। पर ईशांत शर्मा की एक स्लो गेंद को हेडिन पढ़ नहीं पाए और दूर से ही खेल बैठे। नतीजा यह रहा कि गेंद उनके बल्ले से लगकर लक्ष्मण के हाथों में चली गई। उन्होंने 33 रनों की बढ़िया पारी खेली। आस्ट्रलिया इसके बाद के रनों को बोनस मानते हुए बट्र ली को भेजा। बट्र ली सातवें विकेट के रूप में हसी का बढ़िया साथ दिया। चायकाल तक दोनों साथ रहे। इसके बाद तो आस्ट्रलियाई पारी ढह गई। शुरुआत में जो जहीर आसान लग रहे थे, वही चाय के बाद घातक हो गए। पहले उन्होंने बट्र ली को 27 रनों पर क्लीन बोल्ड किया। फिर मिशेल जानसन को खाता ही नहीं खोलने दिया। आखिरी में विकेट पर जमें माइकल हसी भी उनकी गेंद से अपना स्टम्प न बचा पाए। हसी की साहसिक पारी 146 रनों तक चली। तरस गए जम्बो विकेट के लिए इससे पहले शायद ही किसी ने टीम इंडिया जब्बो यानी अनिल कुंबले को विकेट के लिए तरसता देखा होगा। घरलू मैदान पर जुटे जमाम दर्शक इंतजार करते रहे कि कुंबले को विकेट मिले और वे तालियाँ बजाएँ। उन्होंने आस्ट्रलिया के खिलाफ पहली पारी में विकेट हासिल करने की तमाम कोशिश की। पर सफलता उनसे दूर रही। उन्होंने आठ बार छोर बदल-बदल कर सबसे ज्यादा गेंदबाजी की और रन भी दिए। उनका गेंदबाजी विश्लेषण देखिए। 43 ओवर, 6 मेडन, 120 रन और विकेट एक भी नहीं। पोंटिंग, हसी, कैटिच, बट्र ली व ब्राड हेडिन ने उन्हें बड़ी आसानी से खेला। उनके इस प्रदर्शन को देखकर पूर्व फिरकी गेंदबाज शिव रामकृष्णन तो कहते हैं कि ‘अब कुंबले में पहले जैसी धार व मारक क्षमता नहीं रही। उनमें पहले जैसा फ्लिपर व गुगलीबाज नहीं दिख रहा है। मैदान पर भी वह बेहद सुस्त नजर आ रहे हैं। आस्ट्रलियाईयों को कम स्कोर पर रोकने के लिए वह कोई रणनीति भी नहीं बना पाए। मैदान पर अनुभवी क्रिकेटर व पूर्व कप्तान, सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली राहुल द्रविड़ से सलाह नहीं कर रहे थे। यही नहीं मैदान पर विकेट कीपर के रूप में महेन्द्र सिंह धौनी जैसा एक दिवसीय व ट्वेन्टी-20 का कप्तान भी मौजूद है।

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