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अभूतपूर्व भारत-यूएस परमाणु करार पर दस्तखत

तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद भारत और अमेरिका के बीच हुए परमाणु समझौते के साथ ही भारत का अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आणविक व क्रिटिकल टैक्नोलोजी का वनवास समाप्त हो गया। विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी और अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलिसा राइस ने वाशिंगटन में बहुप्रतिक्षित 123 करार पर दस्तखत कर दिए। इसके बाद अब परमाणु समझौता प्रभाव में आएगा। दो दिन पहले ही राष्ट्रपति बुश ने इस आशय के विधेयक पर हस्ताक्षर किए थे। इस मौके पर मुखर्जी ने अमेरिका को आगाह भी किया कि समझौता लागू होने के साथ इसके प्रावधानों का पालन करना दोनों देशों की जिम्मेदारी और बाध्यता है। अब एसा करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। उनका आशय था कि अब अमेरिका प्रावधान से बाहर जा कर न्यूक्िलयर आपूर्ति को रोक नहीं सकता। इस समझौते के बाद अब अमेरिकी कंपनियां भी भारत के साथ अरबों रुपये का परमाणु व्यापार कर सकती हैं। मुखर्जी ने कहा कि समझौते में अधिकारों और बाध्यताओं का सावधानीपूर्वक संतुलन किया गया है। हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी विदेश मंत्री राइस ने कहा कि विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र (अमेरिका) और विश्व के सबसे विशाल लोकतंत्र (भारत) अपने साझा मूल्यों के साथ करीब आए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों के साझा हितों के साथ अब हम बराबरी के पायदान पर पहले से ज्यादा नजदीक आ गए हैं। राइस ने इस समझौते को ‘अभूतपूर्व’ करार देते हुए कहा कि इसके बाद अब एसा कुछ नहीं है जिसे हम नहीं कर सकते। 123 समझौते की धारा 5.6 के तहत अमेरिका ने वादा किया है कि आईएईए निगरानी में रहते वह भारतीय रिएक्टरों को न्यूक्िलयर ईंधन की निर्बाध आपूर्ति करगा। समझौते में यह प्रावधान भी है कि यदि दोनों पक्षों में से कोई भी समझौते हटना चाहे तो वह एक वर्ष का नोटिस देगा। इस बीच बातचीत के जरिए यह भी तय किया जाएगा कि अलग होने के मजबूर होने का न्यायोचित कारण है या नहीं। प्रणव मुखर्जी ने कहा कि तीन वर्षो की अवधि में कुछ एसे क्षण भी आए जब लगा कि समझौता होने पर शंका पैदा हुई । इस सवाल का सीधा जवाब न देते हुए कि भारत परीक्षण करता है तो समझौते का भविष्य क्या होगा, मुखर्जी ने यह कहा कि हर देश की सांविधानिक बाध्यताओं पर अपनी आंतरिक व्यवस्था होती है। भारत-अमेरिका परमाणु करार पर पाकिस्तान की आशंकाओं को दूर करते हुए विदेश मंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि पाकिस्तान को इस बार में कोई आशंका नहीं होनी चाहिए। भारत परमाणु अप्रसार के लिए प्रतिबद्ध है और परीक्षण न करने स्वघोषित फैसले पर कायम है। हम पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध बनाना चाहते हैं और समग्र वार्ता के जरिए हम एसा कर भी रहे हैं। पाकिस्तान और अमेरिका के बीच असैनिक परमाणु समझौते की संभावना पर एक सवाल के जवाब में मुखर्जी ने कहा कि हम सिविल न्यूक्िलयर सहयोग के जरिए परमाणु ऊरा के शांति पूर्ण इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहते हैं। हम मानते हैं कि हर देश को परमाणु ऊरा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल का अधिकार है।ं

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  • Web Title: अभूतपूर्व भारत-यूएस परमाणु करार पर दस्तखत