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शादी के बगैर भी बेबी की इचााजत!

सिंगल पेरंट वाले बच्चों को अब कानूनी मान्यता मिलने जा रही है। हो सकता है कि आपको यह अटपटा लगे लेकिन केंद्र सरकार प्रजनन में सहायक तकनीकों (एआरटी) के नियमन के लिए जो कानून बनाने जा रही है, उसमें महिला या पुरुष को बगैर शादी के इन प्रजनन तकनीकों से मां बनने का मौका मिल जाएगा। ऐसा पिता या मां अपने बच्चे की एकमात्र कानूनी अभिभावक होगी। वैसे इन प्रावधानों पर विवाद होने के आसार हैं क्योंकि जैसे ही सिंगल परंट को कानूनी मान्यता मिलेगी, कई और कानूनों में भी बदलाव करने पड़ेंगे। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एआरटी रगुलेशन बिल 2008 तैयार कर लिया है। बिल में इस कारोबार के नियमन के लिए कई प्रावधान किए गए हैं लेकिन कुछ प्रावधान ऐसे हैं जो भारतीय सामाजिक परंपराओं और वैज्ञानिक तकनीकों के बीच सामंजस्य नहीं बना पा रहे हैं। बिल में कहा गया है कि कोई भी अविवाहित महिला या पुरुष इन तकनीकों का लाभ उठाकर संतान-सुख प्राप्त कर सकता है। कोई महिला विवाह न करना चाहे तो वह टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक से बच्चा हासिल कर सकती है। इसी प्रकार यदि कोई पुरुष ऐसा चाहे तो उसे किराये की कोख की मदद लेनी होगी। ऐसे जन्म लेने वाले बच्चों के सिंगल परंट होंगे। इतना ही नहीं, बिल में यह भी प्रावधान किया जा रहा है कि लिव इन रिलेशंस के तहत साथ रह रहे जोड़े भी इस सुविधा का लाभ हासिल कर सकते हैं। ऐसे में जन्म लेने वाले बच्चे पर दोनों अविभावकों का कानूनी अधिकार होगा। इस प्रावधान के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से ‘लिव इन रिलेशंस’ को भी कानूनी मान्यता प्रदान की जा रही है।

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