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सांप्रदायिक हिंसा के पीछे साजिश!

राष्ट्रीय एकता परिषद की यहां सोमवार की बैठक में यह आशंका प्रकट की जा सकती है कि एक महीने में जगह-ागह सांप्रदायिक हिंसा के पीछे कुछ खास कट्टरपंथी शक्ितयों का हाथ है। केंद्र सरकार सीधे-सीधे संघ परिवार का नाम भले न ले, इस बहाने वह भाजपाविरोधी दलों को अपनी बातें प्रमुखता से रखने का मौका दे देगी। इस आशंका की वजहें भी हैं। उड़ीसा, कर्नाटक, केरल आदि राज्यों में तो ईसाइयों पर हमले की खबरं मीडिया में प्रमुखता से आ ही रही हैं। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में शुक्रवार को हिंसा भड़की और 8 लोग मार गए। इनमें तीन लोग पुलिस फायरिंग में मर। उधर, असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने खुलासा किया कि दरांग और उदालगुड़ी जिलों में बोडो आदिवासियों और बांग्लादेशी मुसलमानों के बीच 2 से 6 अक्टूबर तक हुई झड़पों और पुलिस फायरिंग में 55 लोग मार गए और 111 लोग घायल हुए। यहां 2 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। यूपी का हाल भी अच्छा नहीं है। राज्य इंटेलिजेंस की रिपोर्ट है कि श्रावस्ती और कुछ अन्य जिलों में हो रहे उपद्रवों के पीछे आम लोग या धार्मिक भावनाएं नहीं, बल्कि साजिश है जो चुनावी फायदे के लिए रची जा रही है।

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