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चुप्पी

चुप्पीड्ढr वे केंद्र सरकार के राज्यमंत्री हैं। सुप्रीमो ने जिन कुछ लोगों को राज्य सरकार पर हमला करने की जिम्मेवारी सौंप रखी है, उनमें ये सज्जन भी शामिल हैं। सो, उस दिन जब उन्होंने संवाददताओं की फौा बुलाई तो भाई लोग उम्मीद में थे कि कुछ कड़क बोलेंगे। खास कर बाढ़ राहत पर तो जरूर बोलेंगे। ऐसा कुछ नहीं हुआ। मंत्रीजी एक महान नेता के नाम पर समारोह आयोजित कर रहे हैं। उसी पर बोलते रहे। आप कहेंगे कि बाढ़ राहत से शायद वे संतुष्ट हों। बात दूसरी थी। उन्हें लगा कि भाई लोग बाढ़ को ले उड़ेंगे और मूल मुद्दा छूट जाएगा।ड्ढr ड्ढr बेचारेड्ढr नेताजी को एयरपोर्ट पर अहसास हुआ कि पेड़ का टूटा हुआ फल फिर से नहीं लग सकता है। अधिक दिन नहीं हुए। नेताजी ने भगवा चोला छोड़कर हरा साफा धारण कर लिया। निराशा हाथ लगी तो घर लौट गए। उस दिन एयरपोर्ट पर अध्यक्षजी आए। सबके साथ वह भी स्टेट हैंगर में गए। उम्मीद थी कि कोई न कोई कार्यकर्ता उनके लिए जरूर कुर्सी छोड़ेगा। कुर्सी पर बैठे सभी लोगों से आंखें मिलाईं। मुस्कुराए भी। मगर, किसी ने अपनी कुर्सी नहीं दी। बेचार अंतिम कतार में खड़े हो गए। यही तो वक्त है। एक दौर था जब लोग उनके सामने कुर्सी पर बैठने से पहले कई बार सोचते थे।ड्ढr ड्ढr निराशड्ढr गीता का उपदेश च्,ााहे जितना घोंट लीजिए। सच यह है कि फल की आस में ही आदमी कर्म करता है। अपने नेताजी पर भी यही बात लागू है। सुप्रीमो के बचाव में रो बयानबाजी करते हैं। सुप्रीमो पर हमला कहीं हो, ये सज्जन बचाव के लिए खड़े हो जाते हैं। इसके चलते सत्तारूढ़ दल के साथ-साथ अपने दल के भी कुछ नेता नाराज रहते हैं। उन्होंने नाराजगी की परवाह नही की। सोचा कि अगली बार लोकसभा टिकट के तौर पर करम का फल मिल जाएगा। इधर फल मिलने के आसार कम हो गए हैं। भाई लोग सुप्रीमो का समझाने की कोशिश कर रहे हैं-ये अगर दिल्ली चले गए तो पटना में आपका मोर्चा कौन संभालेगा।ड्ढr ड्ढr फर्कड्ढr भा-ापा के एक बड़े नेता के दिन अच्छे चल रहे हैं। पार्टी में पूछ भी बढ़ी है। बढ़े भी क्यों न? वे एक मेडिकल कालेज के मालिक जो बन गए हैं। पहले पहाड़ तोड़ने का उनका कारोबार था। बिजुरिया बाबा की नजर जब पहाड़ों पर पड़ी तो नेताजी का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ। उनका कारोबार बदला। मेडिकल के कारोबार में आए। यह सब तो सामान्य मामला है। असली मामला यह है भाजपा के नेता अपने मेडिकल कालेज में बिजुरिया बाबा के पुत्र की मदद ले रहे हैं। संभव है कि ये इस मेडिकल कालेज के छात्रों को पढ़ाएं भी। बिजुरिया बाबा के पुत्र डाक्टर हैं।

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  • Web Title: राजदरबारच