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कल तक परिवहन निगम बंटवार की समय-सीमा

राज्य पथ परिवहन निगम को झारखंड के विभिन्न डिपो से सालाना 16 करोड़ रुपये की आमदनी होती है। परंतु राज्य में निगम का गठन नहीं होने के कारण यह राशि बिहार के खाते में चली जाती है। राज्य में निगम के चार डिवीजन रांची, धनबाद, जमशेदपुर और दुमका हैं। आय के आठ करोड़ रुपये स्थापना मद में खर्च होते हैं और आठ करोड़ का शुद्ध मुनाफा है। वर्ष 1में बिहार सरकार ने इसे सफेद हाथी घोषित कर दिया था, लेकिन 2001 से निगम लाभ कमाने लगा।राज्य सरकार ने फायदे में चलनेवाला निगम को घाटे का सौदा बताकर इसके गठन पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्तूबर तक दोनों राज्यों के बीच निगम के बंटवार का निर्देश दिया है। परिवहन मंत्री एनोस एक्का राज्य हित में परिवहन निगम के गठन की बात तो करते हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गयी है। तत्कालीन परिवहन मंत्री माधव लाल सिंह ने भी सरकार से निगम के गठन की मांग थी। लेकिन इस दिशा में कुछ नहीं हुआ। निगम बंटवारे के मुद्दे पर गठित कमेटी की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों के बीच 6535 के फार्मूले के तहत बंटवारे का आदेश दिया है। जनवरी के पहले सप्ताह तक परिसंपत्ति और देनदारियों का बंटवारा कर लेने को कहा है। बंटवारा की स्थिति में झारखंड को पहले फेा में 8.25 करोड़ बिहार को देने होंगे।

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