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निगरानी जांच का आदेश

राज्य के मेडिकल कॉलेजों में व्यापक पैमाने पर फर्ाी एडमिशन का मामला उाागर होने के बाद सरकार हरकत में आ गयी है। स्वास्थ्य मंत्री भानू प्रताप शाही ने मामले की निगरानी जांच के आदेश दिये हैं। सचिव को लिखे पीत पत्र में मंत्री ने फर्ाी नामांकन को गंभीर बताते हुए वर्ष 2000 से अब तक हुए तमाम एडमिशन की जांच निगरानी से कराने को कहा है। इधर झारखंड संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद ने भी अपने स्तर से जांच शुरू कर दी है। पहले चरण में पिछले तीन बैच के नामांकनों की स्क्रूटनी की जा रही है। बहरहाल, ‘मुन्नाभाई’ और ‘रंजीत डॉन’ के इस रैकेट के पर्दाफाश से मेडिकल कॉलेजों में हड़कंप है।ड्ढr क्या लिखा है मंत्री नेड्ढr स्वास्थ्य मंत्री भानू प्रताप शाही ने अपने पीत पत्र में लिखा है कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों में फर्ाी नामांकन की सूचना हिन्दुस्तान में प्रकाशित हुई है। निश्चय ही सरकार के लिए यह चिंता का विषय है। इस पर कठोरता से कार्रवाई करने की आवश्यकता है। राज्य हित में आवश्यक है कि वर्ष 2000 से ही इन तीनों कालेजों में एमबीबीएस में नामांकन की वैद्यता की जांच निगरानी से करायी जाये। अत: निगरानी से जांच के लिए आवश्यक कार्रवाई शीघ्र प्रारंभ की जाये।ड्ढr पर्षद की कार्रवाईड्ढr इधर, झारखंड संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद ने भी अपने स्तर से मामले की जांच प्रारंभ कर दी है। पर्षद के ओएसडी रामाकांत सिंह ने बताया कि वे पिछले तीन बैच 2006, 2007 और 2008 में हुए एडमिशन की स्क्रूटनी कर रहे हैं। इसमें दोषी पाये जानेवाले छात्र-छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज करायी जायेगी। सभी जेल भेजे जायेंगेड्ढr रांची। झारखंड संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद (ोसीइसीइबी) ने फर्ाी एडमिशन के खेल में शामिल छह छात्र-छात्राओं के फोटो जारी किये हैं। ये छात्र 2008 बैच की परीक्षा में दूसर के बदले शामिल हुए थे। यही छात्र काउंसिलिंग में भी शामिल हुए और फर्ाी नामांकन कराने में सफल रहे। जेसीइसीबी के ओएसडी रामाकांत सिंह ने बताया कि फर्ाी नामांकन का सारा खेल फोटो इमेजिंग सिस्टम के जरिये किया गया। इसमें किसी बड़े रैकेट या फिर कोचिंग इंस्टीट्यूट का हाथ हो सकता है। श्री सिंह ने बताया कि फॉर्म भरने के समय ऐसे छात्र-छात्रा की तलाश की जाती है, जिसका चेहरा असली कैंडिडेट से मिलता-ाुलता हो। इसके बाद कैंडिडेट के हेयर स्टाइल, मूंछों, लिप्स आदि को फोटो इमेजिंग के जरिये नकली छात्र के फोटो में फिट कर दिया जाता है। परीक्षा में सफल होने के बाद नकली छात्र-छात्रा ही काउंसिलिंग में शामिल होते हैं। यहां फोटो से चेहरा मिलता-ाुलता होने के कारण ये पकड़ में नहीं आते। काउंसिलिंग के बाद पर्षद की ओर से नामों की अनुशंसा मेडिकल कॉलेजों को कर दी जाती है। यहां एडमिशन में कोई दिक्कत नहीं आती और नकली छात्र एडमिशन ले लेता है।

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  • Web Title: निगरानी जांच का आदेश