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विकास प्राधिकरणों में है स्टाफ की कमी

प्रदेश के कई विकास प्राधिकरणों में उपाध्यक्ष और टाउन प्लानर ही नहीं हैंोबकि कई प्राधिकरणों में दो-दो टाउन प्लानर तैनात हैं। यह सब तब हैोब प्राधिकरण के पास नगर नियोकों की अच्छी खासी संख्या है। तमाम विकास प्राधिकरणों में अभी तक पूरा तकनीकी स्टाफ तक नियुक्त नहीं किया गया है।ड्ढr प्रदेश में 26 विकास प्राधिकरण हैं। इनमें से एक र्दान विकास प्राधिकरण ऐसे हैंोिनमें उपाध्यक्ष ही नहीं हैं। और उपाध्यक्ष का कामोिलाधिकारियों केोिम्मे है।ोिलाधिकारी विकास प्राधिकरण को पूरा समय नहीं दे पाते हैं,ोिससे विकास काम बाधित होता है। इसके अलावा करीब आधा र्दान ऐसे विकास प्राधिकरण हैं,ोहाँ पूरा तकनीकी स्टाफ तक नहीं है।ड्ढr सूबे के कई विकास प्राधिकरणों में चीफ टाउन प्लानरों की भी खासी कमी है लेकिन किसी प्राधिकरण में शासन ने दो-दो टाउन प्लानर तैनात कर रखे हैं और कुछ में एक भी नहीं। गााियाबाद में एनसीआर के नगर नियोक को गााियाबाद विकास प्राधिकरण की भीोिम्मेदारी सौंपी गई है।ड्ढr खास बात तो यह है कि ये नगर नियोक वेतन एनसीआर से लेते हैं और काम विकास प्राधिकरण में करते हैं। यह तब हो रहा हैोब शासन ने कानपुर में एक ही पद पर दो-दो नगर नियोकों की तैनाती कर रखी है।ड्ढr लखनऊ समेत पाँच विकास प्राधिकरणों में मुख्य नगर नियोक हैं ही नहीं। इसी प्रकार 14 विकास प्राधिकरणों में अवर अभियंताओं की खासी कमी है।

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