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मायावती ने अब मुसलमानों पर डाले डोरे

बहुजन समाज पार्टी के मुस्लिम अधिवेशन में सोमवार को यहाँ भारी भीड़ जुटी। मंच पर प्रमुख मुस्लिम उलेमाओं और सीएमएस का खचाखच भरा ऑडिटोरियम आयोजक बसपा नेताओं के हौंसले बढ़ाने के लिए काफी था। फिर पार्टी प्रमुख एवं मुख्यमंत्री मायावती ने भी अल्पसंख्यकों के लिए सौगातों की झड़ी लगाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। उन्होंने लखनऊ में अरबी-फारसी विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर लोकसभा-विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण में आबादी के हिसाब से अल्पसंख्यकों को तरजीह देने तक की कई घोषणाएँ की। वहीं उनके जख्मों पर यह कह कर मरहम लगाने से भी नहीं चूँकी कि बगैर पुख्ता सबूतों के किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने केन्द्र सरकार से बटला हाउस मुठभेड़ और उड़ीसा-कर्नाटक में ईसाई मिशनरियों पर हमले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी माँग की जिससे उसको लेकर उठ रही शंकाएँ दूर हो सकें और कुछ राजनीतिक दल इसकी आड़ में राजनीतिक रोटियाँ न सेंक सके। बसपा के मुस्लिम अधिवेशन में पार्टी प्रमुख के निशाने पर कांग्रस रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट ने कांग्रस राज की पूरी पोल दी है। आजादी के 60 सालों में सर्वाधिक पचास साल केन्द्र में और चालीस साल राज्यों में कांग्रस की सरकार रही लेकिन अल्पसंख्यकों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में सर्वाधिक दंगे कांग्रस राज में हुए और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा दंगे समाजवादी पार्टी की सरकार में हुए। उन्होंने कहा कि कांग्रस और समाजवादी पार्टी ने मुस्लिम समाज का प्रयोग वोट बैंक की तरह तो किया लेकिन उनके सामाजिक, शैक्षणिक उत्थान और सत्ता में भागेदारी के लिए कुछ नहीं किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र को देखना चाहिए कि आखिर वो कौन से कारण है कि कुछ लोग भ्रमित होकर आतंकवादी रास्ते पर चल पड़े हैं। उन्होंने कहा कि समस्या की जड़ में जाए बगैर इसका हल नहीं निकलने वाला। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सबसे बड़ी समस्या पूर मुस्लिम समाज को शक से देखे जाने की है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी और हिंसा करने वालों की कोई जाति नहीं होती। ये लोग मानवता और इंसानियत के दुश्मन हैं। बगैर ठोस सबूत के कुछ लोगों की हरकत के लिए पूर समाज को परशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश में स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं कि आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन किसी निर्दोष को नहीं पकड़ा जाएगा। पुख्ता सबूतों के आधार पर ही कार्रवाई होनी चाहिए ताकि यूपी के मुसलमान अपने को सुरक्षित महसूस करंे।

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