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किसानों को नहीं मिल रहा शोध का लाभ

सरकार भी मानने लगी है कि आईसीएआर और राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय में हो रहे शोध का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। यह स्थिति तब है जब कृषि विभाग के अधिकारियों की बड़ी फौा प्रसार कार्य में जुटी है। साथ ही इस कार्य पर सरकार की बड़ी राशि भी खर्च हो रही है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार अब सभी शोध संस्थानों में हो रहे शोध को किसानों तक पहुंचाने के लिए राज्यस्तरीय समिति बनाने जा रही है। समिति के अध्यक्ष कृषि विभाग के प्रधान सचिव होंगे तथा कृषि और पशुपालन विभाग के निदेशकों के अलावा राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति तथा आईसीएआर के निदेशक इसके सदस्य होंगे। कृषि प्रसार कार्य में जुटे एनजीओ और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को भी सदस्य के रूप में समिति में रखने पर विचार चल रहा है। ‘राज्यस्तरीय कृषि अनुसंधान विस्तार समिति’ नाम से बनने वाली उक्त समिति का प्रस्ताव बनकर तैयार है लेकिन अभी इसे फाइनल टच दिया जाना बाकी है।ड्ढr ड्ढr विभागीय सूत्रों ने बताया कि इस संबंध में लोक सभा की लोक लेखा समिति ने भी एक रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के अनुसार यही स्थिति देश के अन्य राज्यों में भी है। समिति की रिपोर्ट में ही सभी राज्यों को ‘राज्यस्तरीय कृषि अनुसंधान विस्तार समिति’ बनाने की सलाह दी गई है। राज्य सरकार ने इसपर कार्रवाई शुरू कर दी है। समिति का भी मानना है कि शोध कार्यों पर जितना खर्च हो रहा है उसका लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। समन्वय का अभाव इसके मूल कारण के रूप में दर्शाया गया है। राज्य में बनने वाली नई समिति शोध को किसानों तक पहुंचाने वाली प्रणाली को सुदृढ़ करगी तथा इसके लिए नये उपाय भी सुझाएगी।

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