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आखिर मामला भी तो मुख्तार अंसारी का है

‘‘वर्ष 2005 में हुए मऊ दंगों में गवाही न होने और पक्षद्रोही होोाने के कारण आरोपित विधायक मुख्तार अंसारी को अदालत ने बरी कर दिया। मेर संज्ञान में आया है कि इस मामले में न्यायालय के फैसले के विरुद्ध अपील नहीं की गई। मेरा अनुरोध है किोिला शासकीय अधिवक्ता से पूर मामले का निरीक्षण कराकर विशेष अपील दाखिल करने में सम्बन्ध में अपने स्तर पर निर्णय लें..माननीय न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए विशेष अधिवक्ता नियुक्त करने की अनुशंसा भी कीोाती है।’’ यह पत्र बीती एक मार्च को मऊ के तत्कालीन एसपी पीके श्रीवास्तव ने डीएम को लिखा।ड्ढr ावाब में तत्कालीन डीएम पी गुरुप्रसाद ने एसपी मऊ को 31 मार्च 2008 को पत्र लिखा-‘ाितेन्द्र यादव आदि ने मुख्तार अंसारी के खिलाफ 302 व अन्य धाराओं में मुकदमा र्दा कराया था। हत्या व राय के विरुद्ध सामाािक सौहार्द को खंडित करते हुए कानून व्यवस्था छिन्न-भिन्न करने ौसी गंभीर धारा में भी आरोप पत्र राय की पूर्व अनुमति न मिल पाने के कारण दाखिल नहीं कियाोा सका। विवेचक ने भी इतने गंभीर मामले में गवाहों का संबंधित मािस्ट्रेट के न्यायालय में धारा 164 के तहत बयान नहीं करायाोबकि यह पहले ही मालूम था कि प्रकरण अत्यंत महत्वपूर्ण व्यक्ितयों से सम्बंधित था और अभियोन साक्षियों को गवाही न देने के लिए विवश कियाोा सकता है। ऐसे लापरवाह विवेचक पर कार्रवाई कीोानी चाहिए।ोहाँ तक विशेष अधिवक्ता नियुक्त करने अनुशंसा की बात है तो उस बार में एसपी मऊ पहले ही 2006 में पत्र ो चुके हैं लिहा अब फिर से अनुशंसा कीोरूरत नहीं.।’ड्ढr डीएम-एसपी की यह आपसी कागाी खानापूरी और आरोप-प्रत्यारोप हैं, माफिया विधायक मुख्तार अंसारी पर मऊ दंगों के संदर्भ में कीोाने वाली कानूनी कार्यवाही को लेकर। पिछली सरकार के शासन में कोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्य न होने पर मुख्तार अंसारी को बरी किया था। मुख्यमंत्री मायावती ने घोषणा की थी कि पूर प्रकरण की फिर सेोाँच होगी और अदालत में फिर से विशेष याचिका दाखिल कीोाएगी।ड्ढr इस मामले में डीाीपी और गृह सचिव कई बार बयान दे चुके हैं किोल्द ही विशेष अधिवक्ता की तैनाती कर अपील दाखिल कीोाएगी पर अब तक कुछ नहीं हुआ। प्रमुख सचिव गृह फतेह बहादुर सिंह ने कहा है कि वेोल्द ही इस मामले की फाइल तलब करंगे और फिर उचित कार्यवाही होगी।

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