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म्युचुअल फंड की हालत संभालने का रास्ता साफ

घरेलू म्यूचुअल फंड (एमएफ) उद्योग पर बने रिडेंप्शन के दबाव से निपटने के लिए सरकार और रिार्व बैंक ने ठोस कदम उठाते हुए बैंकों से अपेक्षाकृत सस्ते धन की उपलब्धता सुनिश्चित करने का रास्ता खोल दिया है। इसके तहत म्यूचुअल फंड उद्योग बैंकों से सिर्फीसदी की ब्याज दर पर उधारी हासिल हासिल कर सकेंगे। यह सुविधा सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट के आधार पर 15 दिनों की सीमित अवधि के लिए उपलब्ध कराई गई है। रिडेंप्शन का मतलब निवेशकों की ओर से अपने धन की निकासी से होता है। इससे पहले चिदंबरम ने इस बात का संकेत दिया कि म्यूचुअल फंड उद्योग को सस्ती उधारी के लिए ब्याज दर का निर्धारण उद्योग प्रतिनिधि और इंडियन बैंक एसोसिएशन मिलकर करंगे। बाद में आरबीआई ने इस पर पहल करते हुये म्यूचुअल फंड उद्योग कोीसदी की ब्याज दर पर 20,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का रास्ता साफ कर दिया है ताकि उद्योग आम लोंगों की ओर से बने रिडेंप्शन के दबाव से निपटने के लिए बैंकों से अपेक्षित धन हासिल कर सकें। यह फैसला आरबीआई के बड़े अधिकारियों और सेबी चेयरमैन सी.बी.भावे की बैठक के बाद आया। म्यूचुअल फंड उद्योग को सहूलियत प्रदान करने के लिए उठाये गये कदमों का घरलू कॉरपोरट जगत ने स्वागत किया है। उद्योग चैंबर सीआईआई के मुताबिक रिार्व बैंेक का यह फैसला म्यूचुअल फंड उद्योग को खासी राहत पहुंचाएगा। चैंबर के मुताबिक नकद आरक्षित अनुपात में दो बार की कमी के बाद अभी भी घरलू वित्तीय तंत्र में 40,000 करोड़ रुपये की कमी बनी हुई है।

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