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चुनाव खिंचे तो हो सकता है एक और संसद सत्र

सीरियल बम धमाके, आतंकवाद, महंगाई व अमेरिकी आर्थिक मंदी के डांवाडोल हालात के बीच आगामी 17 अक्टूबर से आरंभ हो रहे संसद सत्र को यूपीए सरकार लोकसभा का आखिरी सत्र बता रही है। लेकिन आम चुनावों की प्रकिया अप्रैल-मई 200तक खिंचने की सूरत में सरकार को एक संक्षिप्त सत्र जनवरी- फरवरी तक बुलाना पड़ सकता है। केंद्र सरकार के एक आला अधिकारी ने माना कि यह छोटा सत्र इसलिए आवश्यक होगा ताकि 31 मार्च को समाप्त हो रहे वित्त वर्ष के बाद की प्रथम तिमाही के लिए वित्त व रल बजट के लिए लेखानुदान यानी वोट आन एकांउट पर संसद की अग्रिम मुहर लगाई जा सके। गौरतलब है कि तेरहवीं लोकसभा के जाते- जाते पूर्व एनडीए सरकार को भी इसी तरह एक संक्षिप्त सत्र बुलाना पड़ा था। मंगलवार को पांच प्रदेशों में घोषित आम चुनाव कार्यक्रम के बाद उपजे सियासी माहौल के बीच सरकार के राजनीतिक प्रबंधकों को नहीं लगता कि शुक्रवार से आंरभ हो रहा संसद सत्र 23 नवंबर तक खिंच सकेगा। इसकी वजह है कि विपक्ष के ज्यादातर बड़े नेता व सांसद चुनावों में व्यस्त हो जाएंगे। संकेत हैं कि पूरा सत्र अक्टूबर माह में ही सिमट जाएगा। सरकार संकट में फंसी है कि किस विधेयक को लाए और किसे टाले। यही कारण था कि मंगलवार को यहां संसदीय कार्यमंत्री वायलार रवि की अध्यक्षता में केंद्र सरकार के मंत्रालयों के सचिवों के साथ प्रस्तावित विधेयकों की रूपरखा पर चर्चा की लेकिन कामकाज पर स्थिति स्पष्ट न हो सकी। संसदीय कार्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस सत्र में सरकार के पास तात्कालिक तौर पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति व राज्यपालों के वेतन बढ़ोत्तरी के विधेयक तैयार हैं। छठे वेतन आयोग को लागू करने के लिए सरकार को जो अतिरिक्त बजट का इंतजाम करना है, उसके लिए भी संसद अपनी संस्तुति देगी। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के जजों के वेतन बढ़ोत्तरी व जजों के खिलाफ शिकायतों की जांच संबंधी बिल व असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा दिलाने संबंधी विधेयक भी पूरी तरह तैयार है।

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