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संघर्ष को मिला सम्मान

राज्य के कई प्रखंडों से आयी महिलाओं ने कहा कि समुदाय के लिए जारी संघर्ष को अंजाम तक ले जायेंगी। चाहे इसके लिए उन्हें पूरी जिंदगी क्यों न लड़ना पड़े। मौका था एचपीडीसी सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय ग्रामीण महिला नेतृत्वकर्ताओं के सम्मान समारोह का। इसमें सात महिलाओं को उनके संघर्ष के लिए सम्मानित किया गया।ड्ढr यह कार्यक्रम वर्ल्ड रूरल डे उपलक्ष्य में 14 अक्तूबर को मनाया गया। मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता रो केरकेट्टा ने इन्हें शॉल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। साहेबगंज की स्वास्तिका संघमित्रा भी शामिल हुईं। कार्यक्रम का आयोजन जेंडर आजीविका और संसाधन मंच के तत्वावधान में किया गया था।ड्ढr संघर्ष की गाथाड्ढr बढ़मनीजोर कुरडेग प्रखंड 65 पंचायत की फुलजेंसिया डुंगडुंग ने बताया कि उसने 14 साल की उम्र में अपनी बड़ी बहन के हत्यार के खिलाफ संघर्ष शुरू किया, जो अब भी जारी है। पलामू की रामपतिया देवी ने ठेकेदारों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। सुनीता देवी ने नरगा के तहत काम लेकर दिखाया कि महिलाएं भी सफलतापूर्वक काम कर सकती हैं। सिलवे गांव रांची की पाको भुटकुमार ने जमीन दलालों के विरुद्ध संघर्ष चलाया। सिदरौल की मुन्नी कच्छप ने महिला ट्रैफिकिंग, शराबबंदी और सामुदायिक जमीन बचाने के लिए लड़ाई लड़ी। दुमका की मझली टूडु और सुमित्रा ने कई विरोधों को झेलते हुए स्वंय सहायता समूह बनाया।

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