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ओबीसी कोटे का मामलाखाली सीटें सामान्य वर्ग को मिलें

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों आईआईटी, आईआईएम तथा केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ओबीसी की खाली सीटें अक्तूबर के अंत तक सामान्य श्रेणी के छात्रों को दे दी जाएं। कोर्ट ने कहा कि ओबीसी छात्रों के लिए केवल 10 फीसदी अंक ही कम रखे जा सकते हैं, इससे ज्यादा नहीं। वहीं ओबीसी के लिए क्रीमी लेयर की आय सीमा 2.5 से बढ़ाकर चार लाख रुपये प्रतिवर्ष करने के केंद्र सरकार के फैसले की न्यायिक समीक्षा के लिए तैयार हो गया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से इस बार में नई याचिका दाखिल करने को कहा है।ड्ढr ड्ढr मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केाी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पांच जजों की पीठ ने यह आदेश तब दिया जब याचिकाकर्ताओं ने कहा कि क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ाकर सरकार ओबीसी आरक्षण के उद्देश्य को समाप्त कर रही है, क्योंकि इसके बाद आरक्षित वर्ग का उच्च तबका ही आरक्षण का पूरा लाभ ले लेगा।ड्ढr ड्ढr याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने बताया कि ओबीसी केीसदी लोगों की वार्षिक आमदनी 25 हाार रुपये से भी कम है। लेकिन सरकार ने इस तथ्य का नजर अंदाज कर दिया। हालांकि कोर्ट ने कहा कि नए वेतनमानों के बाद यह क्रीमी लेयर का दायरा बढ़ाया जा सकता है। लेकिन वेणुगापाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट स्वयं ही फरवरी 2007 में क्रीमी लेयर का दायरा तीन लाख रुपये करने के सरकारी फैसले को रद्द कर चुका है। ऐसे में चार लाख का दायरा सही कैसे माना जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि सीटें खाली रख कर धन और फैकल्टी को व्यर्थ न किया जाए बेहतर होगा कि 54 फीसदी सीटें सामान्य छात्रों को दे दी जाएं। दरअसल दो वर्ष के आईआईएम कोर्स के लिए सरकार को प्रथम वर्ष के लिए 27 फीसदी तथा दूसर वर्ष के लिए फिर 27 फीसदी सीटें और फैकल्टी बढ़ानी पड़ेंगी । यानी दो वर्ष में कुल 54 फीसदी छात्रों के लिए धन और फैकल्टी मुहैया करानी होगी।

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