DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सुनो, लोकतंत्र के झंडाबरदारों.

लोकतंत्र में आम चुनाव को पर्व-अनुष्ठान का दर्जा प्राप्त है। उल्लसित जन-ान के दमकते चेहर पर हिलोरं मारती आशाएं, सपने साकार होने का उत्साह। किताबों में ऐसी ही खुशनुमा फिाां की चर्चा मिलती है। लेकिन, अभागा है झारखंड। शुरुआत ही खूनी होली से हुई। उग्रवादियों ने तो तांडव किया ही, रक्षक भी भक्षण से बाज नहीं आये। पांच निर्दोषों को मार डाला। और पूरी हो गयी रस्मअदायगी। आखिर और क्या नाम दें? वास्तविक आंकड़े छोड़िये, बाजीगरी के नतीजे भी सरकारी गणित की चुंगली खाते हैं- पिछले चुनाव से, और दस फीसदी घट गये मतदाता। आखिर जन भागीदारी हो भी तो कैसे! कहते हैं, लोकशाही में चुनावी यज्ञ जनता की हिस्सेदारी से पूरी होती है। हां, हिस्सेदारी तो रही लेकिन बलिवेदी पर चढ़ा दिये जाने वाले बकरों सी।ड्ढr प्रशासन का तुगलकी फरमान जारी हुआ। महीने भर पहले से राज्य की लोक परिवहन व्यवस्था पर कब्जा जमा लिया वरदीवालों ने। कहा गया चुनाव की जरूरत है। अर भई, मतदान तो महा दो दिन होना था। दो नहीं, चार दिन धड़ते गाड़ियां। लेकिन, जब शासक नकचढ़े हों तो कारिंदों की जी-हुाुरी सारी हदें पार कर जाती हैं। मानवता कोने में सुबकती रहे, इन्हें फर्क नहीं पड़ता- दो धड़ने को कहा है, चार ले चलो, ‘हुकुम’ खुश होंगे! नीचे से ऊपर तक, किसी ने पल भर भी नहीं सोचा कि बुधुआ, मंगरू, शनिचरी के घरों में अब हफ्ते-महीने कैसे जलेंगे चूल्हे? मेहनत-मजदूरी के लिए दूर गांव से शहर तक यही इक्का-दुक्का लॉरियां तो जरिया थीं।ड्ढr यहीं ‘बस’ नहीं! शासन जब निर्मोही-तानाशाहों का हो तो गिद्धों की मौज होती ही है। घात लगाये बैठे जमाखोरों की भी मौज हो गयी। फिलहाल देखें, तो गणतंत्र के इस महापर्व ने क्या दिया झारखंडियों को? यही ना, खून-खराबा, आतंक, कुशासन की कुछ और पींगें। और जाते-ााते, अगले कई महीनों के लिए निवालों पर मंहगाई की सांसत। क्या इसे ही पर्व कहते हैं?ड्ढr पर्व शायद उनका था जो बम-पटाखे चला रहे थे, या फिर पर्व अब पांच साल उनका होगा जो उस रस्मअदायगी के बाद अपने-अपने एयरकंडिशंड सुरक्षित दरबों में लौट आये हैं। आम आदमी तब भी चिलचिलाती धूप का आदी था, आगे पेट की ज्वाला भी बरदास्त कर लेगा। सुन रहे हो लोकशाही के झंडाबरदारो! तुम्हारा ‘चुनाव’ ऐसे संपन्न हुआ, इस झारखंड में।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: सुनो, लोकतंत्र के झंडाबरदारों.