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कालाबाजारी की खुली छूट

झारखंड के व्यापारियों को खाद्यान्न की कालाबाजारी की खुली छूट मिली हुई है। यहां न तो प्राइस कंट्रोल की कोई व्यवस्था है और न ही जमाखोरों के स्टॉक जांच की। जमाखोर जितना चाहें स्टॉक कर सकते हैं और कृत्रिम अभाव बता कर सस्ती दर पर मंगाये गये खाद्यान्न को महंगी दर पर बेच सकते हैं। पूर राज्य में एक अप्रैल से वैट लागू हो गया है, परंतु इसका लाभ राज्य सरकार को नहीं मिल रहा है। 24 अप्रैल तक राजकोष में न एक रुपये जमा कराये गये और न ही व्यापारियों ने सेल्स टैक्स का रािस्ट्रेशन कराया। जबकि वैट के नाम पर खाद्यान्न महंगा हो गया है।ड्ढr राज्य के विभिन्न बाजार प्रांगणों में धड़ल्ले से खाद्यान्न की बिक्री की जा रही है, परंतु इसे देखनेवाला कोई नहीं है। राजकोष को भरने में न तो विभागीय अधिकारी रुचि ले रहे हैं और न ही व्यापारी। नतीजा आम लोगों को दो जून की रोटी पर भी आफत हो गयी है। हालांकि बाजार में इस बात की भी चर्चा हो रही है कि अधिकारी और व्यापारियों के बीच समझौता हो गया है। झारखंड में वैट तो लागू हो गया, लेकिन चुनाव के बाद इसे एक्ांप्शन मिल जायेगा। यही कारण है कि व्यापारी निडर होकर बगैर वैट लिये ही खाद्यान्न की बिक्री कर रहे हैं।ड्ढr दुकानदार क्यों नहीं घटाते दाम?ड्ढr एक बार जब दुकानदार कृत्रिम अभाव दिखा कर खाद्यान्न को महंगा कर देते हैं, तो फिर उसका दाम घटने का नाम नहीं लेता। अगर कीमत में 10 रुपये की बढ़ोतरी होती है, तो पांच रुपये घटा कर मूल्य तय कर लेते हैं। इसे देखनेवाला कोई नहीं है। न तो जिला प्रशासन का ही ध्यान इस ओर जाता है और न सेल्स टैक्स विभाग का। बाजार समिति को तो कृषि टैक्स वसूलने से फुर्सत ही नहीं है। जिला प्रशासन पूछने पर सीधे पल्ला झाड़ लेता है। कहते हैं, उनके पास जांच करने का कोई अधिकार नहीं है। झारखंड में आवश्यक वस्तु निषेध अधिनियम (सेवेन इसी) लागू होने के बाद भी प्रभाव नहीं हो पा रहा है। नतीजा दुकानदार अपने हिसाब से स्टॉक देख कर दाम बढ़ाते-घटाते हैं।ड्ढr चैंबर के एक अधिकारी ने बताया कि दाम बढ़ाना-घटाना उनके बस की बात नहीं है। दाम तो खरीद पर तय होता है। दलहन और चीनी की कीमतों में आयी उछाल का लोकल बाजार से कोई वास्ता नहीं है। उत्पादन कम होने के कारण इनकी कीमतें बढ़ी हैं। जसे ही उत्पादन बढ़ेगा, कीमतें अपने आप घट जायेंगी। हां कुछ मीलर के कारण खाद्यान्नों के भाव जरूर बढ़ते हैं। झारखंड के सभी राइस मीलर अपने उत्पाद को दबा देते हैं और कृत्रिम अभाव बता कर महंगे दामों पर बेचते हैं।ड्ढr कालाबाजारियों की मनमानीड्ढr नहीं चलेगी : डीसीड्ढr उपायुक्त राजीव अरुण एक्का ने कहा कि कालाबाजारियों की मनमानी नहीं चलने दी जायेगी। जिला प्रशासन लोकसभा चुनाव संपन्न कराने में जुटा था। चुनाव की आड़ में कई व्यवसायियों ने अपने गोदाम में माल डंप कर लिया है। इसके कारण महंगाई बढ़ रही है। प्रशासन ऐसे लोगों को चिह्न्ति कर सख्त कार्रवाई करगा। उन्होंने कहा कि 25 अप्रैल से ही टीम का गठन कर उन्हें बाजार भेजा जायेगा। जो व्यवसायी कालाबाजारी में लिप्त पाये जायेंगे, उनके लाइसेंस रद्द किये जायेंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि चुनाव के कारण बसों और ट्रकों को पकड़ा गया, लेकिन इससे माल का बहुत अधिक शार्टेा नहीं हुआ है। चुनाव के तत्काल बाद सभी गाड़ियों को मुक्त भी कर दिया गया है। मनमाना मूल्य वसूलने वाले व्यवसायियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।ड्ढr चैंबर वाजिब मूल्य पर सामान उपलब्ध करायेगा: किंगरड्ढr चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीा के अध्यक्ष अंचल किंगर ने कहा है कि वर्तमान में खाद्यान्न, आलू, प्याज एवं खाद्य तेलों की कीमतें बढ़ने में और गलत कार्य में संलग्न व्यापारियों क ो साथ देने में चैंबर की कोई भागीदारी नहीं है। बड़े पूंजीपतियों द्वारा स्टॉक रखने के कारण कीमतें बढ़ी हैं। इसके अलावा चुनाव के दौरान ट्रकों की कमी एवं भाड़े में बढ़ोतरी से परशानी हुई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में माल की कमी नहीं होने दी जायेगी और उपभोक्ताओं को वाजिब मूल्य पर समान उपलब्ध कराया जायेगा। किंगर ने कहा कि चैंबर लगातार खाद्य एवं आलू प्याज पर लगे वैट को मुक्त कराने का प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में 2006, 2007 एवं 2008 में सरकार ने अस्थायी अधिसूचना जारी कर इसे कर मुक्त किया था। विधानसभा स्थगित होने, राष्ट्रपति शासन एवं आचार संहिता के कारण इससे संबंधित अधिसूचना जारी नहीं हो सकी।

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