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जारी है तेल में डंडी मारने का खेल

पेट्रोल पंप के कर्मचारियों और वाहन मालिकों के बीच आए दिन होने वाली चिक-चिक के बावजूद राजधानी समेत राज्य के अन्य हिस्सों में मिलावट और कम माप का खेल बदस्तूर जारी है। पेट्रोल पंपों पर कम और मिलावटी तेल देने की शिकायतें आम हैं लेकिन कोई भी अधिकारी और पंप मालिक यह बात स्वीकारने को तैयार नहीं है। इंडियन ऑयल कारपोरशन के महाप्रबंधक अभय झा मिलावट के धंधे को सिर से नकारते हुए कहते हैं कि पेट्रोल पंपों पर मिलावटी तेल की जांच पांच स्तरों पर की जाती है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि पिछले एक साल में तीन पंपों पर मिलावट की शिकायत पाए जाने पर उनको टर्मिनेट कर दिया गया।ड्ढr ड्ढr साथ ही 18 पंपों के खिलाफ कार्रवाई की गई। दूसरी ओर पेट्रोलियम कंपनियां और इसे रोकने के लिए जिम्मेदार अफसर कभी यह जानने की कोशिश नहीं करते कि आखिर वाहनों के प्रदूषण का कारण क्या है? ‘हिन्दुस्तान’ द्वारा पेट्रोलियम पदार्थो में मिलावट और कम माप से संबंधित जो खोजबीन की गई, उसका परिणाम काफी सनसनीखे है। राजधानी के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर एक लीटर के बजाए 00 मिलीलीटर या उससे भी कम पेट्रोल-डीाल मिल रहा है। साथ ही इसकी शुद्धता की भी कोई गारंटी नहीं। राजधानी में ही पिछले दिनों तीन पेट्रोल पंपों पर कम तेल देने की शिकायत सही पायी गई।ड्ढr इन पंपों के नोजलों को सील कर दिया गया और माप-तौल एक्ट के तहत उन पर जुर्माना भी किया गया। अधिकारी भी दबे स्वर में कम माप और मिलावट की बात स्वीकारते हैं जबकि आम लोग डंके की चोट पर इसके लिए पंप मालिकों और तेल कंपनियों को दोषी ठहराते हैं। ट्रांसपोर्टर और ट्रांसपोर्ट फेडरशन के अध्यक्ष उदय शंकर सिंह ने बताया कि तेल की क्वालिटी इससे समझ लीजिये कि पहले तीन साल में एक बार ट्रक का इांन और पंप बनवाते थे, अब हर छह महीने में पंप बदलना होता है। यही राम कहानी कमोबेश सभी वाहन मालिकों की है।ं

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