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घाटों का दूर से ही निरीक्षण किया मंत्री व डीएम ने

पानी में बांस डालकर देखने पर ही घाटों की सही स्थिति का पता चलेगा सर। ऊपर से अंदाज करना मुश्किल है कि किस घाट की कितनी गहरायी है। नारियल घाट काफी खतरनाक है। इस घाट पर हर साल वर्ष छठ में तीन-चार आदमी डूबते हैं। संसाधान नहीं रहने की वजह से शव निकालना संभव नहीं होता है। दानापुर के एसडीओ सुनील कुमार ने बुधवार को घाटों के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी को उक्त बातें बतायी।ड्ढr ड्ढr बांकीपुर क्लब घाट से सुबह 6:30 बजे स्वास्थ्य मंत्री नंद किशोर यादव, विधायक अरुण कुमार सिन्हा, विधायक नितिन नवीन व जिलाधिकारी जितेन्द्र कुमार सिन्हा ने अन्य अधिकारियों के साथ घाटों का निरीक्षण शुरू किया। बांकीपुर से स्टीमर दानापुर की ओर चली। हालांकि बांकीपुर और दीघा के बीच स्टीमर घाटों के काफी दूर से निकल गई। दूर-दूर तक कछार दिखायी नहीं दिया। एलसीटी घाट, बुद्ध घाट, पहलवान घाट व कुर्ाी घाट आदि घाटों पर पानी तक पहुंचने के लिए लोगों को तीन से चार किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। कछार व पानी के बीच नाला है। बरसात में पानी भर रहने की वजह से रास्ते में दलदल भी बन जाते हैं। स्टीमर से घूमने के कारण बांकीपुर और दीघा घाट के बीच के घाटों की स्थिति की जानकारी जिलाधिकारी को नहीं हो सकी। वैसे इन घाटों के निरीक्षण की खानापूरी जरूर पूरी हो गई। इस बीच मंत्री, विधायक, जिलाधिकारी और प्रशासन के अन्य अधिकारियों के बीच छठपूजा की तैयारी को लेकर चर्चा होती रही।ड्ढr ड्ढr मंत्री ने डीएम को बताया कि नगर निगम में कुछ फिक्स्ड लोग हैं जो घाटों की सफाई करते हैं। वो भी इस लिए करते हैं क्योंकि उनका पिछले काम का बकाया है। यह परम्परा 1से चल रहा है। उस समय मैं डिप्टी मेयर था। डीएम ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों से जानकारी ली कि किन-किन घाटों पर लोग पूजा छठ करने आते हैं। इस बीच मंत्री ने अधिकारियों को सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं की भी जानकारी दी।

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