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दिल्ली की गद्दी दें बदल देंगे झारखंड

एतिहासिक मोरहाबादी मैदान में चुनावी शंखनाद करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने जनता का आह्वान किया कि दिल्ली की सत्ता बदलें, एनडीए को केंद्र में बिठायें, झारखंड भी बदलेगा।ड्ढr झारखंड में सुशासन नहीं आ पाया: राज्य से लगाव की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मेर गृहमंत्रित्व काल में तीन राज्यों का निर्माण हुआ। इनसे मेरा खास रिश्ता है, पर दुखद यह भी है कि छत्तीसगढ़-उत्तराखंड के विकास को देख जो खुशी मिलती है, वैसी खुशी झारखंड में नहीं मिलती। अलग होने से झारखंड की बिहार पर से निर्भरता तो समाप्त हो गयी, पर यहां के लोगों के लोगों को सुशासन नहीं मिल पाया।ड्ढr फिर झारखंड बना सहारा : केंद्र और राज्य की यूपीए सरकारों पर कड़ा प्रहार करते हुए ‘पीएम इन वेटिंग’ आडवाणी ने कहा कि मनमोहन सरकार हर मोर्चे पर फेल रही। इस सरकार के कार्यकाल में जितने घोटाले हुए, पहले कभी नहीं देखा गया। संसद में सरकार बचाने के लिए खुलेआम पैसे का खेल खेला गया। फिर राव की सरकार बचाने का मामला हो या फिर मनमोहन सरकार के बचाने का प्रकरण, अनैतिक तरीके से बचाने में झारखंड ही सहारा बना।ड्ढr लोग पैसा कमाने आते हैं: आडवाणी ने कहा आज लोग राजनीति में पैसा कमाने के लिए ही आते हैं, उन्हें देश से कोई लेना-देना नहीं, बस पैसा मिलता रहे।ड्ढr अफाल को फांसी क्यों नहीं: यूपीए पर आतंकवाद को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाते हुए आडवाणी ने कहा कि आतंकी का कोई धर्म या मजहब नहीं होता। वह अपराधी है, लेकिन वह यूपीए की सरकार से पूछना चाहते हैं कि संसद पर हमले का दोषी अफाल अगर हिंदू, सिख, दलित या आदिवासी होता, तो उसे फांसी नहीं हो गयी होती। फिर आतंकवाद को संप्रदायिक कौन बना रहा है? पहले पाक से आतंकी आते थे। आज देश में ही सिमी यह काम कर रहा है। मनमोहन पीएम बने, तो कहा था कि संसाधनों पर पहला हक मुस्लिमों का है, अच्छी बात थी, पर केरल में एसटी छात्रों को पढ़ाई में 240 रुपये की सब्सिडी और मुसलमानों को 14000, ऐसे सरकार थोड़े ही चलती है। आडवाणी की सुरक्षा में चूकड्ढr अजय शर्मा रांची आतंकियों की हिटलिस्ट में शामिल लालकृष्ण आडवाणी की सुरक्षा में रांची में भारी चूक हो गयी। इससे उनकी सुरक्षा में तैनात कमांडो भी हैरत में हैं। आडवाणी को एयरपोर्ट से हरमू वीआइपी मार्ग होते हुए स्टेट गेस्ट हाउस से मंच तक ले जाया जाना था। पुलिस टीम, जो पायलट में तैनात थी उसने अपने मन से रास्ता बदल दिया। आडवाणी को मुख्यमंत्री आवास के मार्ग से ले जाया गया। काफिले का रूट बदलने से उनकी सुरक्षा अधिकारी हैरत में आ गये। रास्ते में जहां सुरक्षाकर्मी तैनात थे, आडवाणी को वहां से नहीं ले जाया गया। कंट्रोल से बात हुई, कोई बोलने को तैयार नहीं। इतना ही नहीं सुरक्षा को धता दिखा आडवाणी को मंच तक बीच मैदान से ले जाया गया। इस चूक से सुरक्षा एजेंसियां गंभीर हैं। एनएसजी की टीम तो इसकी केंद्र को एक रिपोर्ट भी करने वाली है।

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