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भारत आएगा अमेरिकी परमाणु व्यापारिक दल

अमेरिका में असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कार्यरत उद्यमियों का प्रतिनिधिमंडल आगामी दिसंबर में भारत की यात्रा पर जाएगा। अमेरिका के वाणिय मंत्री कोलर्ोस गतिरेज ने बुधवार को अमेरिका भारत व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की आेर से आयोजित ग्रीन इंडिया सम्मेलन में यह जानकारी दी। गतिरेज ने बताया कि अमेरिकी उद्यमियों का भारत जाने वाला यह अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल होगा और यह दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आपसी सहयोग की संभावनाएं तलाशेगा। गौरतलब है कि यूएसआईबीसी और सीआईआई भारत अमेरिका असैन्य परमाणु करार पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के बीच परमाणु सहयोग की दिशा में निजी क्षेत्र की भागीदारी को अधिक से अधिक सुनिश्चित करने की संभावनाएं तलाशने में जुटे हैं। ग्रीन इंडिया सम्मेलन में भी पर्यावरण के अनुकूल स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा को उद्योग जगत में बढ़ावा देने वाली अमेरिकी कंपनियां डाआे केमिकल्स, जीई और वेस्टन सोल्यूसंस भी हिस्सा ले रही हैं। सम्मेलन के माध्यम से अन्य कंपनियों को भी भारत में स्वच्छ तकनीकी को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक इकाईयों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विशेष दूत श्याम सरन अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री विलियम एस कोहेन और ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान शिंदे और सरन ने भारत के अधोसंरचनात्मक विकास की दिशा में पर्यावरण के अनुकूल स्वच्छ तकनीकी का इस्तेमाल किए जाने की जरूरत पर बल देते हुए अमेरिकी कंपनियों से भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया। शिंदे ने कहा कि भारत सरकार देश के विकास में स्वच्छतम तकनीकी को ही बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में हर संभव उपाय किए जा रहे हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय विकास के मानकों के अनुरूप भारत को विकसित देश बनाने के लिए बिजली की 2012 तक प्रति व्यक्ित मांग को एक हजार यूनिट तक ले जाने का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा को राष्ट्रीय वकास की धुरी बनाने से इस मकसद को पाने में भरपूर मदद मिलेगी। शिंदे ने भारत अमेरिका परमाणु करार को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इसके फलीभूत होने से भारत न सिर्फ अमेरिका बल्कि अन्य देशों के साथ भी परमाणु व्यापार कर सकेगा और इससे भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को भी उसके उद्देश्य तक ले जाया जा सकेगा। इससे पहले सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में अमेरिका में भारत के राजदूत रोनेन सेन ने कहा कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच सभी क्षेत्रों में आपसी सहयोग को नई ऊंचाई तक पंहुचाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक स्तर पर व्याप्त ऊर्जा और पर्यावरण संकट से निपटने में भी मदद मिलेगी।

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