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चांद की तस्वीर भेजेगा टीएमसी

शायर आज भी कहते हैं कि चांद में दाग है और एक पुरानी कहावत है कि चांद पर एक बुढ़िया चरखा कात रही है। चांद पर दशकों पहले मनुष्य के कदम पड़ने के बावजूद असल में वहां क्या है, इस बाबत अभी काफी-कुछ पता लगना बाकी है। अत्याधुनिक खोजी उपकरणों से लेस चंद्रयान-1 अनसुलझे रहस्यों में झांकने की पूरी तैयारी के साथ रवाना होगा। चांद पर 3साल पूर्व मानव पहुंचा था। दुनिया के अब तक के तमाम अभियानों को गिनें तो चंद्रयान देश का पहला और दुनिया का 68वां मिशन है। चंद्रयान में भेजे जा रहे 11 पेलोड (खोजी उपकरणों) में से एक है ‘टेराइन मैपिंग स्टीरियो कैमरा’ (टीएमसी)। इस अत्याधुनिक कैमर से चंद्रमा की पूरी सतह की थ्री डायमेंशन में मैपिंग होगी। ग्राउंड रयूलेशन 5 मीटर का है। यानी चंद्रसतह के हर पांच मीटर की दूरी पर क्या है क्या नहीं, इसकी हाई स्पाइटल थ्रीडी तस्वीरं तैयार होंगी। इसरो के अनुसार इस त्रिभुजाकार टीएमसी का निर्माण स्पेश एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद के वैज्ञानिकों ने किया है। इसका आकार 370 गुणा 220 गुणा 414 मिलीमीटर है। वजन है 7 किग्रा। जो तस्वीरं ये तैयार करता है, उन्हें हाथ के हाथ डिजिटल रूप में बदलता है। फिर इस डिजिटल डाटा को 50 एमबी प्रति सेकेंड की रफ्तार से इसरो के इंडियन स्पेस साइंस डाटा सेंटर को प्रेषित करेगा। प्रक्षेपण के साढ़े पांच दिन के बाद चंद्रयान कक्षा में स्थापित हो जाएगा तथा टीएमसी का कार्य आरंभ कर देगा। अंतरिक्ष विज्ञानी प्रो. यशपाल के अनुसार चंद्रयान में लगे उपकरण पूर्ववर्ती अभियानों से कहीं ज्यादा एडवांस हैं। फिर कक्षा में घूमकर चंद्रयान चांद के हर एंगल से मैपिंग करगा। पहले न तो इतने एडवांस उपकरण भेजे गए और न ही चंद्रमा की भिन्न-भिन्न दिशाओं से मैपिंग हुई।

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