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चोट कर्मियों की दिवाली, पर एयर इंडिया में नहीं

ोट एयरवेज ने अंतत: 100 कर्मचारियों को सशर्त वापस लेने का फैसला कर लिया, जिन्हें मंगलवार और बुधवार को निकाला गया था। कंपनी पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकर और सरकार की ओर से कर्मचारियों की बहाली के लिए काफी दबाव था। मंदी से जूझ रही विमान सेवा ने 15 से 25 प्रतिशत वेतन कटौती के साथ अपने सार कर्मचारियों को फिर नियुक्त करने का फैसला किया है। कंपनी ने यह फैसला देर रात एक प्रेस कांफ्रेंस में सुनाया। इससे पहले गुरुवार दिन में इस मसले को हल करने के लिए सरकार ने शुक्रवार को मुम्बई में त्रिपक्षीय बैठक बुलाने का फैसला किया था। तभी यह स्पष्ट हो गया था कि मजदूर संगठनों और निकाले गए कर्मचारियों के भारी दबाव का सामना कर रही सरकार जेट प्रबंधन के प्रतिनिधियों से बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करेगी। श्रम मंत्रालय में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया था कि छंटनीग्रस्त कर्मचारियों के नियुक्ित संबंधी अनुबंध पत्रों की जांच करने के बाद यह तय किया जाएगा कि प्रबंधन के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा सकती है। इससे पहले, छंटनी पर केंद्र सरकार ने साफ तौर पर किनारा करते हुए किसी तरह के हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था। लेकिन नेताओं, छंटनीग्रस्त कर्मचारियों के प्रदर्शन के बाद कंपनी को अपना फैसला बदलना पड़ा। बेकाबू घाटा व खर्च कम करने के लिए निजी एयरलाइनों द्वारा कर्मचारियों की छंटनी की नीति का लगभग अनुसरण करते हुए अब सरकारी क्षेत्र की विमान कंपनी एयर इंडिया ने अपने 32 हाार कर्मचारियों में से 15 हाार को लंबी छुट्टी पर भेजने का मन बना लिया है। पिछले दो दिनों में जेट एयरवेज ने भी करीब 2000 कर्मचारियों को निकालने का फैसला किया। इन घोषणाओं के साथ ही यहां देश के उड्डयन उद्योग की गुलाबी तस्वीर पेश करने के लिए आयोजित पहले इंडिया एविएशन 2008 हवाई शो के उत्साह पर पानी फिर गया। चेन्नई में एयर इंडिया के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक रघु मेनन ने एक समाचार एजेंसी को खबर दी कि एयर इंडिया 15,000 कर्मचारियों को 4-5 साल की बिना वेतन छुट्टी पर भेजने की योजना बना रही है। यह खबर फैलते ही नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल काफी नाराज दिखे। तुरंत डेमेज कंट्रोल शुरू हुआ। एयर इंडिया के जनसंपर्क निदेशक जितेन्द्र भार्गव ने सफाई दी कि यह योजना ऐसे नॉन-आपरशनल स्टाफ के लिए होगी जो स्वेच्छा से इसे स्वीकार करना चाहेंगे। इस बार में नागरिक उड्डयन मंत्री ने इतना ही कहा कि कर्मचारियों की छंटनी नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक ‘वॉलिंटियरी लीव स्कीम’ का फैसला जल्दीबाजी में किया गया है। इसके लिए न तो कर्मचारी यूनियन से बात की गई और न ही इसके नतीजों का ध्यान रखा गया।

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