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समलैंगिकता पर सुलह की कोशिशें

समलैंगिकता को कानूनी मान्यता दिए जाने का मुद्दा गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में भी उठा। प्रधानमंत्री ने गृह मंत्री शिवराज पाटिल और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अंबुमणि रामदास को सलाह दी कि दोनों मंत्रालय मिल-बैठकर इस विवाद को सुलझाएं और मसले का सही हल निकालें। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य मंत्री डा. अंबुमणि रामदास समलैंकिगता को गैरकानूनी ठहराने वाली धारा 377 को हटाने की पैरवी कर रहे हैं जबकि गृह मंत्रालय इसके खिलाफ है। कैबिनेट बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि पीएम ने दोनों मंत्रियों से मिलकर इस मुद्दे का समाधान ढूंढने को कहा है। चूंकि यह मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए कैबिनेट ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया। उल्लेखनीय है कि दिल्ली उच्च न्यायालय में समलैंगिकों की तरफ से दायर याचिका में आपसी सहमति से दो पुरुषों के बीच बनने वाले संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटाने की मांग की है। हाईकोर्ट के नोटिस पर केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि चूंकि देश की धार्मिक पुस्तकों में समलैंगिकता को ठीक नहीं माना गया है, लिहाजा ऐसे संबंधों को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इस पर सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि वह धार्मिक मान्यताओं पर जाने की बजाय वैज्ञानिक तथ्य पेश कर। सिब्बल ने कहा कि मामला कोर्ट में है और अदालत जो भी फैसला करगी वह सरकार को मंजूर होगा। उन्होंने कहा कि एक मुद्दे पर सरकार के दो मंत्रालयों को कोर्ट में अलग-अलग हलफनामे नहीं देने चाहिए। बकौल सिब्बल, सेक्स वर्करों एवं समलैंगिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के प्रावधानों को खत्म करने से उनमें एचआईवी सक्रमण का खतरा कम हो जाएगा।

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  • Web Title: समलैंगिकता पर सुलह की कोशिशें