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पानी में बहा दिए गए पौने दो करोड़ रुपए

सूबे में कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम को अपनी मनमर्जी से क्रियान्वित कर स्वास्थ्य अधिकारियों ने पौने दो करोड़ रूपये पानी में बहा दिये। इससे बीमारी और इलाज के नाम पर कागजी खानापूरी ही हो पायी। इतना ही नहीं भारत सरकार को उपयोगिता प्रमाण पत्र भी नहीं दिया गया। इसके कारण 2006-07 वित्तीय वर्ष में इस मद में राशि नही ंमिली। लापरवाही की हद यह है कि वित्तीय वर्ष 2005 से 2008 में बीमारी से मरने वाले मरीाों की संख्या गलत बतायी गयी है। राज्य से लेकर 21 जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों ने उदासीनता और लापरवाही बरती है। यह खुलासा प्रधान महालेखाकार (पीएजी) की रिपोर्ट से हुआ।ड्ढr ड्ढr इससे राज्य व जिला स्तर के अधिकारियों में हड़कम है। रिपोर्ट के अनुसार 2005-06, 06-07 और 07-08 वित्तीय वर्ष में मुजफ्फरपुर के कांटी पीएचसी, सकरा रफरल अस्पताल में भर्ती मरीाों को पैसा, भोजन तक सही से नहीं दिये गये। ऑडिट अधिकारियों ने निरीक्षण में पाया कि इन स्वास्थ्य केन्द्रों पर सामान्य स्लाइन तक मरीाों को स्वयं खरीदना पड़ता है। रोचक है कि राज्य स्वास्थ्य समिति इन तीन वित्तीय वर्ष में मुजफ् फपुर, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, बेगुसराय, भागलपुर, बांका, सीतामढ़ी, शिवहर, सारण, सिवान, गोपालगंज, पश्चिमी एवं पूवी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, पटना, वैशाली, नालंदा, जहानाबाद, अरवल, भोजपुर, बक्सर, खगड़िया, मुंगेर एवं लखीसराय जिलों में 0 हाार 832 मरीाों में मात्र 13 की मरने की रिपोर्ट दी है।ड्ढr लेकिन ऑडिट अधिकारियों ने जांच में पाया कि मुजफ्फरपुर समेत पांच जिलों में 76 मरीा की मौत हो चुकी है। ऑडिट टीम ने पिछले तीन वर्ष में खर्च की गयी एक करोड़ 66 लाख राशि पर आपत्ति जतायी है।

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