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धन खर्च करने में ग्राम्य विकास विभाग अव्वल

चालू वित्तीय वर्ष के छह महीने गुजर चुके हैं लेकिन करीब एक दर्जन विभाग विकास योजनाओं से संबंधित धनराशि खर्च करने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। दूसरी ओर ग्राम्य विकास विभाग अपने बजट की 66 फीसदी राशि खर्च कर इस मामले में अव्वल चल रहा है। दूसर नंबर पर समाज कल्याण विभाग है।ड्ढr प्राविधिक शिक्षा विभाग ने करीब 23.34 करोड़ रुपए की बजट राशि के विपरीत बीते सितम्बर माह तक मात्र 5.52 फीसदी राशि खर्च की है, जबकि माध्यमिक शिक्षा के मद में करीब 111 करोड़ की बजट राशि में से 14.57 फीसदी राशि खर्च हो पाई है। प्राथमिक शिक्षा के मद में 2,213 करोड़ रुपए की बजट राशि के विपरीत केवल 35.21 फीसदी राशि खर्च हो पाई है। उच्च शिक्षा विभाग में करीब 135 करोड़ रुपए के विपरीत करीब 35.56 फीसदी राशि खर्च हुई है।ड्ढr एलोपैथिक चिकित्सा विभाग के 511 करोड़ रुपए के बजट के विपरीत 38.53, चिकित्सा शिक्षा विभाग के 571 करोड़ रुपए के बजट के विपरीत करीब 41 फीसदी राशि खर्च हुई है। ग्राम्य विकास विभाग बजट राशि खर्च करने में अव्वल साबित हुआ है। इस विभाग की करीब 140 करोड़ रुपए की बजट राशि में से 66.72 फीसदी राशि खर्च हो चुकी है।

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  • Web Title: धन खर्च करने में ग्राम्य विकास विभाग अव्वल