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घर नहीं, बिस्तर नहीं, पर बैंक में है खाता

रहने के लिए घर नहीं, सोने के लिए बिस्तर नहीं, फिर भी बैंक में है खाता। रुपये जमा व निकासी के लिए एटीएम कार्ड। यह सड़कों पर जीवन व्यतीत करने वाले लोगों के लिए एक सपना लगता है, पर यह सपना हकीकत में बदलने लगा है। रिक्शा चालक दिलीप कुमार के हाथ में जब एटीएम कार्ड आया तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अब उसे किसी दुकानदार या व्यापारी के पास मेहनत से कमाया रुपया जमा करने और फिर वापस लेने के लिए खुशामद करने की जरूरत नहीं पड़ती। खुद पैसे जमा कराता और निकालता है। साथ में एक पहचान भी मिली। राजधानी में एसे हाारों लोग हैं जो रिक्शा चला कर, कूड़ाबीन कर गुजारा करते हैं और सड़कों या किसी रैनबसेरा में रात बिताते हैं। राजधानी के एक एनजीओ आश्रय अधिकारी अभियान ने एसे ही लोगों की मदद का बीड़ा उठाया है। संगठन की निदेशक परमजीत कौर और काऑर्डिनेटर ऑपरशन संजय कुमार ने बताया कि यूनियन बैंक के कर्मचारी शाम में तयशुदा शेल्टर हाउस में कार्ड रीिडग मशीन लेकर आते हैं।जहां कार्डधारी रुपया जमा और निकासी करते हैं। यूनियन बैंक की एक शाखा के चीफ मैनेजर अशोक कुमार पाठक ने कहा कि अब तक करीब 45 हाार लोगों ने पंजीकरण कराया है। 600 लोगों को कार्ड दिया जा चुका है।

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