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रनों के एवरस्ट पर सचिन तेंदुलकर

्रीन पर बल्ला उठाए ब्रायन लारा से आगे निकलते सचिन तेंदुलकर का विजुअल। लगभग दस मिनट तक जोरदार आतिशबाजी। स्टेडियम में मौजूद लगभग 15 हाार दर्शकों का खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अभिवादन। यह है क्रिकेट क्रेाी नेशन का अपने हीरो, रिकॉडोर्ं के बादशाह, क्रिकेट के भगवान को सलाम। पिछले लगभग दो दशक में इस मास्टर ब्लास्टर ने अकेले दम पर इस देश को क्रिकेट क्रेाी नेशन बना दिया। इस देश में क्रिकेट यदि धर्म में परिवर्तित हुआ है तो इसका श्रेय भी काफी हद तक सचिन तेंदुलकर को ही जाता है।ड्ढr अपने टेस्ट करियर का पहला मैच खेल रहे पीटर सिडल का नाम भी सचिन तेंदुलकर के साथ इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। उन्हीं की गेंद को थर्डमैन की तरफ खेल कर सचिन ने तीन रन ले वेस्टइंडीा के महान खिलाड़ी लारा के टेस्ट में सबसे ज्यादा रन के रिकॉर्ड (11,ो पार किया था। सचिन ने इस रिकॉर्ड को जसे ही पार किया पूर देश में जसे दीवाली मननी शुरू हो गई। हो भी क्यों न। यह रिकॉर्ड भारतवासियों के लिए दीवाली के जश्न से किसी तरह कम नहीं है। परफेक्शन की बात हो, स्टाइल की बात हो, फेम की बात हो या फिर टैक्िनक है क्रिकेट की हर कला के मास्टर हैं मास्टर ब्लास्टर। भारतीय क्रिकेट की पहचान इन्हीं से है। लाखों क्रिकेटप्रेमियों के हीरो ही नहीं आदर्श भी हैं वे। एक सच्चे चैंपियन हैं सचिन रमेश तेंदुलकर। सचिन के क्रिकेट के भगवान एसे ही नहीं माना जाता। समय-समय पर क्रिकेट के महानतम खिलाड़ियों की उनके बार में टिप्पणियां ही क्रिकेट की दुनिया में एक अलग पहचान दिलाती है। जसे एक बार क्रिकेट के मसीहा डॉन ब्रैडमैन ने कहा था कि उन्हें टेलीविजन पर देखकर मुझे लगता है कि वह मेरी तरह खेलता है। इसी तरह सर गारफील्ड सोबर्स की उनके बार में एक टिप्पणी उन्हें क्रिकेट की दुनिया के महान खिलाड़ियों में शुमार कराती है।ड्ढr उन्होंने कहा था, ‘मैंने बहुत से तेंदुलकर देखे, लेकिन उन सब में ये बेस्ट हैं।’सचिन को क्रिकेट को भगवान पहली बार बैरी रिचर्डस ने कहा था। वनडे में 41 सेंचुरी और सबसे ज्यादा रन। टेस्ट में 3सेंचुरी और सबसे ज्यादा रन, वाकई कोई मसीहा ही इस तरह की स्क्रिप्ट लिख सकता है। वाकई वे क्रिकेट के भगवान हैं। जब विव रिचर्डस जसा वेस्टइंडीा का महान खिलाड़ी यह कह सकता है कि मैं सचिन के टिकट लेकर भी खेलते हुए देखना चाहूंगा। वह प्रतिशत परफेक्ट हैं। ये कुछ एसी बातें हैं जो सचिन के क्रिकेट की दुनिया में एक अलग पहचान दिलाती हैं। अपने पूर करियर में शायद ही वे किसी विवाद में फंसे हों या फिर उन्होंने शायद ही किसी के बार में कोई अभद्र टिप्पणी की हो। शुरू में सचिन को टेनिस का शौक था। वह अपने करियर टेनिस में ही बनाना चाहते थे लेकिन उनके बड़े भाई अजीत तेंदुलकर चाहते थे कि वह क्रिकेट को अपना करियर बनाए। 1विश्व कप ने सचिन को टेनिस के फोरहैंड के बजाय क्रिकेट के कवर ड्राइव की ओर मुखातिब कर दिया। इस समय सचिन की उम्र 10 साल थी। इसके बाद तो सचिन जसे क्रिकेट में समां गए। जिन दिनों सीम और स्विंग का दबदबा हुआ करता था उस समय उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। यह 1ी बात है जब श्रीकांत की कप्तानी में पाकिस्तान गई भारतीय टीम में उन्हें जगह मिली। श्रद्धानंद विद्यामंदिर स्कूल से गुरु रमाकांत अचरकर की कोचिंग में शुरू हुआ क्रिकेट का सफर टेस्ट और वनडे दोनों में कीर्तिमानों को पार कर चुका है।

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  • Web Title: रनों के एवरस्ट पर सचिन तेंदुलकर